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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Lesson-6/ Textbook-आलोक/ Class 10 Hindi

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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Lesson-6/ Textbook-आलोक/ Class 10 Hindi







चिट्ठियों की अनूठी दुनिया




विचारों और भावों के आदान-प्रदान मानव के लिए एक अपरिहार्य सामाजिक कार्य है। पहले यह कार्य मौखिक रूप से संपन्न होता था। 

कालान्तर में लिपि के विकास होने के पश्चात लिखित रूप में यह कार्य होने लगा। पत्र लेखन' इसी की एक कड़ी है। 

प्राचीन काल से ही संदेश के आदान-प्रदान के लिए पत्रों का व्यवहार राजकीय और पारिवारिक क्षेत्रों में होता रहा है। 

संदेश वाहक के रूप में पत्र का पत्र-वाहक के रूप में कबूतर, हरकारा, डाकिया आदि का महत्व बढ़ने लगा। 

धीरे-धीरे पत्रों का ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व भी बढ़ा। परन्तु युग परिवर्तन के साथ-साथ तथा सूचना प्रौद्योगिकी के कारण पत्रों के आदानप्रदान में कुछ कमी आयी। 

टेलीफोन, मोबाइल, फैक्स, ई-मेल, इंटरनेट आदि नए-नए माध्यमों के कारण पत्रों का व्यवहार कम होने लगा। 

परन्तु यह विचारणीय है कि जो अनुभूति और भाव पत्रों से जुड़े होते हैं, वे आधुनिक संचार माध्यमों में भी उसी प्रकार प्राप्त होते हैं या नहीं। 

गौर से देखने पर यह अनुभूत होता है कि पत्र में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो नए संचार माध्यमों में परिलक्षित नहीं होते। इस लिए पत्रों का महत्व अभी बरकरार है। 
प्रस्तुत लेख में लेखक श्री अरविंद कुमार सिंह ने इसी तथ्य को उजागर करने का प्रयास किया है।

पत्रों की दुनिया भी अजीबो-गरीब है और उसकी उपयोगिता हमेशा से बनी रही है। पत्र जो काम कर सकते हैं, वह मंचार का आधुनिकतम साधन नहीं कर सकता है। 

पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश कहाँ दे सकता है। पत्र एक नया सिलसिला शुरू करते हैं और राजनीति, साहित्य तथा कला के क्षेत्रों में तमाम विवाद और नई घटनाओं की जड़ भी पत्र ही होते हैं। 

दुनिया का तमाम साहित्य पत्रों पर केंद्रित है और मानव सभ्यता के विकास में इन पत्रों ने अनूठी भूमिका निभाई है। पत्रों का भाव सब जगह एक-सा है, भले ही उसका नाम अलग-अलग हो। 

पत्र को उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड़ में कागद, तेलुगु में उत्तरम्, जाबू और लेख तथा तमिल में कडिद कहा जाता है। 

पत्र यादों को सहेज कर रखते हैं, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है। हर एक की अपनी पत्र लेखन कला है और हर एक के पत्रों का अपना दायरा। 

दुनिया भर में रोज करोड़ों पत्र एक दूसरे को तलाशते तमाम ठिकानों तक पहुँचते हैं। भारत में ही रोज साढ़े चार करोड़ चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती हैं जो साबित करती हैं कि पत्र कितनी अहमियत रखते हैं।

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सन् 1953 में सही ही कहा था कि"हजारों सालों तक संचार का साधन केवल हरकारे (रनर्स) या फिर तेज घोड़े रहे हैं। 

उसके बाद पहिए आए। पर रेलवे और तार से भारी बदलाव आया। तार ने रेलों से भी तेज गति से संवाद पहुँचाने का सिलसिला शुरू किया। अब टेलीफोन, वायरलेस और आगे रेडार-दुनिया बदल रहा है।"

पिछली शताब्दी में पत्र लेखन ने एक कला का रूप ले लिया। डाक व्यवस्था के सुधार के साथ पत्रों को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए। 

पत्र संस्कृति विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र लेखन का विषय भी शामिल किया गया। 

भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में ये प्रयास चले और विश्व डाक संघ ने अपनी ओर से भी काफी प्रयास किए। 

विश्व डाक संघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का सिलसिला सन् 1972 से शुरू किया गया। 

यह सही है कि खास तौर पर बड़े शहरों और महानगरों में संचार साधनों के तेज विकास तथा अन्य कारणों से पत्रों की आवाजाही प्रभावित हुई है, पर देहाती दुनिया आज भी चिट्ठियों से ही चल रही है। 

फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने चिट्ठियों की तेजी को रोका है पर व्यापारिक डाक की संख्या लगातार बढ़ रही है।

जहाँ तक पत्रों का सवाल है, अगर आप बारीकी से उसकी तह में जाएँ तो आपको ऐसा कोई नहीं मिलेगा जिसने कभी किसी को पत्र न लिखा या न लिखाया हो या पत्रों का बेसब्री से जिसने इंतजार न किया हो। 

हमारे सैनिक तो पत्रों का जिस उत्सुकता से इंतजार करते हैं, उसकी कोई मिसाल ही नहीं। एक दौर था जब लोग पत्रों का महीनों इंतजार करते थे पर अब वह बात नहीं। 

परिवहन साधनों के विकास ने दूरी बहुत घटा दी है। पहले लोगों के लिए संचार का इकलौता साधन चिट्ठी ही थी पर आज और भी साधन विकसित हो चुके हैं।

आज देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपने पुरखों की चिट्ठियों को सहेज और संजोकर विरासत के रूप में रखे हुए हों या फिर बड़े-बड़े लेखक, पत्रकारों, उद्यमी, कवि, प्रशासक, संन्यासी या किसान, इनकी पत्र रचनाएँ अपने आप में अनुसंधान का विषय हैं। 

अगर आज जैसे संचार साधन होते तो पंडित नेहरू अपनी पुत्री इंदिरा गांधी को फोन करते, पर तब पिता के पत्र पुत्री के नाम नहीं लिखे जाते जो देश के करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं। 

पत्रों को तो आप सहेजकर रख लेते हैं पर एसएमएस संदेशों को आप जल्दी ही भूल जाते हैं। कितने संदेशों को आप सहेज कर रख सकते हैं ? तमाम महान हस्तियों की तो सबसे बड़ी यादगार या धरोहर उनके द्वारा लिखे गए पत्र ही हैं। 

भारत में इस श्रेणी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सबसे आगे रखा जा सकता है। दुनिया के तमाम संग्रहालय जानी-मानी हस्तियों के पत्रों का अनूठा संकलन भी है। 

तमाम पत्र देश, काल और समाज को जानने-समझने का असली पैमाना है। 

भारत में आजादी के पहले महासंग्राम के दिनों में जो कुछ अंग्रेज अफसरों ने अपने परिवारजनों को पत्र में लिखे, वे आगे चलकर बहुत महत्व की पुस्तक तक बन गए। 

इन पत्रों ने साबित किया कि यह संग्राम कितनी जमीनी मजबूती लिए हुए था। महात्मा गांधी के पास दुनिया भर से तमाम पत्र केवल महात्मा गांधीइंडिया लिखे आते थे और वे जहाँ भी रहते थे वहाँ तक पहुँच जाते थे। 

आजादी के आंदोलन की कई अन्य दिग्गज हस्तियों के साथ भी ऐसा ही था। गांधी जी के पास देश-दुनिया से बड़ी संख्या में पत्र पहुँचते थे पर पत्रों का जवाब देने के मामले में उनका कोई जोड़ नहीं था। 

कहा जाता है कि जैसे ही उन्हें पत्र मिलता था, उसी समय वे उसका जवाब भी लिख देते थे। अपने हाथों से ही ज्यादातर पत्रों का जवाब देते थे। 

जब लिखते-लिखते उनका दाहिना हाथ दर्द करने लगता था तो वे बाएँ हाथ से लिखने में जुट जाते थे। महात्मा गांधी ही नहीं आंदोलन के तमाम नायकों के पत्र गाँव-गाँव में मिल जाते हैं।

पत्र भेजने वाले लोग उन पत्रों को किसी प्रशस्तिपत्र से कम नहीं .. मानते हैं और कई लोगों ने तो उन पत्रों को फ्रेम कराकर रख लिया है। यह है पत्रों का जादू। 

यही नहीं, पत्रों के आधार पर ही कई भाषाओं में जाने कितनी किताबें लिखी जा चुकी हैं।

वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं हैं। पंत के दो सौ पत्र बच्चन के नाम और निराला के पत्र हमको लिख्यौ है कहातथा पत्रों के आईने में दयानंद सरस्वती समेत कई पुस्तकें आपको मिल जाएँगी। 
कहा जाता है कि प्रेमचंद खास तौर पर नए लेखकों को बहुत प्रेरक जवाब देते थे तथा पत्रों के जवाब में वे बहुत मुस्तैद रहते थे। 

इसी प्रकार नेहरू और गांधी के लिखे गए रवींद्रनाथ टैगोर के पत्र भी बहुत प्रेरक हैं। महात्मा और कवि' के नाम से महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच सन् 1915 से 1941 के बीच पत्राचार का संग्रह प्रकाशित हुआ है जिसमें बहुत से नए तथ्यों और उनकी मनोदशा का लेखा-जोखा मिलता है।

पत्र व्यवहार की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। पर इसका असली विकास आजादी के बाद ही हुआ है। तमाम सरकारी विभागों की तुलना में । 

सबसे ज्यादा गुडविल डाक विभाग की ही है। इसकी एक खास वजह यह भी . है कि यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। 

घर-घर तक इसकी पहुँच है। संचार के तमाम उन्नत साधनों के बाद भी चिट्ठी-पत्री की हैसियत बरकरार है। 

शहरी इलाकों में आलीशान हवेलियाँ हों या फिर झोपडपदियों में रह रहे लोग मनोदशा का लेखा-जोखा मिलता है।

पत्र व्यवहार की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। पर इसका असली विकास आजादी के बाद ही हुआ है। तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल डाक विभाग की ही है। 

इसकी एक खास वजह यह भी है कि यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। घर-घर तक इसकी पहुँच है। 

संचार के तमाम उन्नत साधनों के बाद भी चिट्ठी-पत्री की हैसियत बरकरार है। शहरी इलाकों में आलीशान हवेलियाँ हों या फिर झोपड़पट्टियों में रह रहे लोग, दुर्गम जंगलों से घिरे गाँव हों या फिर बर्फवारी के बीच जी रहे पहाड़ों के लोग, समुद्र तट पर रह रहे मछुआरे हों या फिर रेगिस्तान की ढाणियों में रह रहे लोग, आज भी खतों का ही सबसे अधिक बेसब्री से इंतजार होता है। 

एक दो नहीं, करोड़ों लोग खतों और अन्य सेवाओं के लिए रोज भारतीय डाकघरों के दरवाजों तक पहुँचते हैं और इसकी बहुआयामी भूमिका नजर आ रही है। 

दूर देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीआर्डर अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं। गाँवों या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीआर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।




- श्री अरविंद कुमार सिंह




Class 10 Assamese Notes/Solutions





अभ्यासमाला





बोध एवं विचार 

1. सही विकल्प का चयन करो : 

(क) पत्र को उर्दू में क्या कहा जाता है ? 
(अ) खत
(आ) चिट्ठी 
(इ) कागद
(ई) लेख 

(ख) पत्र लेखन है - 
(अ) एक तरीका
(आ) एक व्यवस्था 
(इ) एक कला
(ई) एक रचना 

(ग) विश्व डाक संघ ने पत्र लेखन की प्रतियोगिता शुरू की - 
(अ) सन् 1970 से
(आ) सन् 1971 से 
(इ) सन् 1972 से
(ई) सन् 1973 से 

(घ) महात्मा गाँधी के पास दुनियाभर से तमाम पत्र किस पते पर आते थे -
(अ) मोहन दास करमचन्द गाँधी-भारत 
(आ) महात्मा गाँधी-भारत 
(इ) बाप जी-इंडिया
(ई) महात्मा गाँधी-इंडिया 

(ड.) तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल किसकी है -
(अ) रेल विभाग
(आ) डाक विभाग 
(इ) शिक्षा विभाग
(ई) गृह विभाग 
2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में): 

(क) पत्र ऐसा क्या काम कर सकता है, जो संचार का आधुनिकतम साधन भी नहीं कर सकता? 
(ख) चिट्ठियों की तेजी अन्य किन साधनों के कारण बाधा प्राप्त हुई है?
(ग) पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?
(घ) गाँधीजी के पास देश-दुनिया से आये पत्रों का जवाब वे किस प्रकार देते थे? 
(ङ) कैसे लोग अब भी बहुत ही उत्सुकता से पत्रों का इंतजार करते हैं ? 

3. उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में): 

(क) पत्र को खत, कागद, उत्तरम, लेख इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताओ। 
(ख) पाठ के अनुसार भारत में रोज कितनी चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती है और इससे क्या साबित होता है? 
(ग) क्या चिट्टियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं? 
(घ) किनके पत्रों से यह पता चलता है कि आजादी की लड़ाई बहुत ही मजबूती से लड़ी गयी थी? 
(ङ) संचार के कुछ आधुनिक साधनों के नाम उल्लेख करो। 

4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में):

(क) पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए? 
(ख) वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं है-कैसे?
(ग) भारतीय डाकघरों की बहुआयामी भूमिका पर आलोकपात करो। 

भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान 

1. केवल 'पत्र' कहने से सामान्यतः चिट्ठियों के बारे में ही समझा जाता है। परंतु अन्य शब्दों के साथ संयोग से पत्र का अर्थ बदल जाता है, जैसे समाचार पत्र । अब पत्र शब्द के योग से बनने वाले पाँच शब्द लिखो। 
2. 'व्यापारिक' शब्द व्यापार के साथ 'इक' प्रत्यय के योग से बना है। 'इक' प्रत्यय के योग से बनने वाले पाँच शब्द पुस्तक से खोजकर लिखो। 
3. दो स्वरों के मेल से होनेवाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं, जैसे - रवीन्द्र = रवि + इन्द्र। इस संधि में इ + इ = ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं-दीर्घ, गुण, वृद्धि और यण। ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के साथ ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते हैं, जैसे - संग्रह + आलय = संग्रहालय, महा + आत्मा = महात्मा। 

इस प्रकार के दस उदाहण खोजकर लिखो और अपने शिक्षक को दिखाओ। 

योग्यता विस्तार : 

1. पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए उपाय सुझाते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखो। 
2. पुस्तकालय में खोजकर जवाहरलाल नेहरू द्वारा इंदिरा गांधी को लिखे गये पत्रों का संग्रह 'पिता के पत्र पुत्री के नाम' पढ़ो और उन पत्रों में वर्णित विविध विषयों का ज्ञान प्राप्त करके मित्रों के साथ चर्चा करो। 

शब्दार्थ एवं टिप्पणी 

अजीबो गरीब = अनोखा 
मुस्तैद = तत्पर 
दस्तावेज = प्रमाण संबंधी कागजात, प्रमाणपत्र 
एसएमएस = लघु संदेश सेवा
सिलसिला = आरंभ होना, रास्ता खुलना
गुडविल = सुनाम, अच्छी छवि
अहमियत = महत्व
हैसियत = दरजा 
हरकारा = दूत, डाकिया, संदेश पहुँचाने
आलीशान = शानदार 
ढाँणी = अस्थायी निवास, कच्चे मकानों की बस्ती जो गाँव से कुछ दूर बनी हो
आवाजाही  = आना-जाना
तह = गहराई
प्रशस्ति पत्र - प्रशंसा पत्र


Conclusion:

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Lesson-6 class 10 hindi Textbook-आलोक Assam seba borad Online reading.










Wrote by Akshay

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