Recent in Technology

कायर मत बन Lesson-11/ Textbook-आलोक/ Class 10 Hindi

Attention Please!

नमस्कार सभी को, अगर आप क्लास १० हिंदी किताब के लेसन को ऑनलाइन पढ़ना चाहते है, तोह ये आर्टिकल आपके लिए हैं

Class 10 Hindi Textbook-आलोक के Lesson-11 कायर मत बन को यहाँ पर ऑनलाइन पढ़ पाएंगे

निचे सभी लेसन का लिंक मिल जायेगा, आपने इस्सा अनुसार उन् आर्टिकल को भी आप बिलकुल फ्री में पढ़ पाएंगे धन्यबाद।

कायर मत बन Lesson-11/ Textbook-आलोक/ Class 10 Hindi






नरेंद्र शर्मा (1913-1989)



कवि नरेंद्र शर्मा आधुनिक हिंदी काव्यधारा के अंतर्गत छायावाद एवं छायावादोत्तर युगों में होने वाले व्यक्तिवादी गीति-कविता के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध हैं। 

व्यक्तिगत प्रणयानुभूति, विरह-मिलन के चित्र, सुख-दु:ख के भाव, प्रकृति-सौंदर्य,आध्यात्मिकता, रहस्यानुभूति, राष्ट्रीय भावना और सामाजिक विषमता के चित्रण के साथ उनके गीतों एवं कविताओं में विषयगत विविधता सहज ही देखी जा सकती है। 

मूलतः भावुक और कल्पनाशील कवि होने पर भी नरेंद्र शर्मा की कुछेक कविताओं में सामाजिक यथार्थ के चित्रण के कारण प्रगतिशीलता के भी दर्शन होते हैं।

गीतिकवि नरेंद्र शर्मा जी का जन्म सन् 1913 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिलांतर्गत जहाँगीर नामक स्थान में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं हुई । 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने एम.ए. किया । तत्पश्चात् वे वाराणसी के काशी विद्यापीठ में शिक्षक नियुक्त हो गए। 

इसी दौरान देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण आपको नजरबंद भी होना पड़ा। फिल्म जगत से आकर्षित होकर आप मुंबई चले गए और वहाँ फिल्मों के लिए गीत लिखते रहे। 

बाद में आकाशवाणी के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए उन्होंने रेडियो की सेवा शुरू की। आप आकाशवाणी में विविध भारती कार्यक्रम के संचालक नियुक्त हुए। 
इस पद पर रहते हुए आपने हिन्दी को खूब बढ़ावा दिया और सुरीले हिन्दी गीतों के प्रसारण के जरिए 'विविध भारती' कार्यक्रम को अत्यंत लोकप्रिय बनाया। सन् 1989 में इस यशस्वी गीति कवि का देहावसान हो गया।

पंडित नरेंद्र शर्मा की गीति-प्रतिभा के दर्शन छोटी अवस्था में ही होने लगे। उनके दो गीत-संग्रह विद्यार्थी जीवन में ही प्रकाशित हुए।  जीवन ने अंतिम दिनों तक आपकी लेखनी चलती रही। 

आपकी काव्य-कृतियों में 'प्रभात फेरी', 'प्रवासी के गीत', 'पलाशवन', मिट्टी के फूल', 'हंसमाला', 'रक्त चंदन', 'कदली वन', 'द्रौपदी' (खण्डकाव्य), 'उत्तर जय' (खण्डकाव्य) और 'सुवर्ण' खण्डकाव्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। कड़वी-मीठी बातें' उनका कहानी-संग्रह है।

यशस्वी गीतिकवि नरेंद्र शर्मा की काव्य-भाषा सरल, प्रांजल एवं सांगीतिक लययुक्त खड़ी बोली है। 
आपने सहज प्रवाहमयी भाषा के जरिए कोमल और कठोर दोनों ही प्रकार के भावों को बखूबी अभिव्यक्ति दी है। 

माधुर्य एवं प्रसाद गुणों की बहुलता के साथ आपकी रचनाओं में कहीं-कहीं ओज गण का भी संचार हुआ है। आत्मीयता, चित्रात्मकता और सहज आलंकारिकता आपकी काव्य-भाषा के तीन निराले गण हैं।

कवि नरेंद्र शर्मा की दृष्टि मूलतः मानवतावादी रही है। मानवता का जयगान उनकी साहित्य-साधना का लक्ष्य रहा है, इसलिए उनकी रचनाओं से पुरुषार्थ, साहस एवं अडिग अविचल भाव का संदेश मिलता है। 

संकलित 'कायर मत बन शीर्षक कविता शर्मा की उत्कृष्ट रचनाओं में से अन्यतम है। इस प्रसिद्ध कविता में कवि ने मनुष्य मात्र से यह आग्रह किया है कि वह और कुछ भी बने, पर कायर कभी मत बने। 

मनुष्य को चाहिए कि उसके मार्ग पर आनेवाली बाधाओं से वह साहस और दृढ़ता के साथ लड़े, कभी भी उनसे समझौता न करे, निराश होकर माथा न पटके, रोएगिड़गिड़ाए नहीं, कभी दु:ख के आँसू न पीए। 

'युद्धं देहि' (लड़ाई करो) कहकर अगर कोई दुष्ट और नीच व्यक्ति सामने आ जाए, तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नहीं तो उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दे। 

किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीठ फेर कर वह न भागे। कवि ने माना है कि हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा मनुष्य की कमजोरी को दर्शाती है, परन्तु कायरता उससे अधिक अपवित्र है। 

कवि ने कहा है कि मानवता अमूल्य है, उसकी रक्षा के सामने व्यक्ति की सुरक्षा का कोई मूल नहीं है। 

सत्य तो यह है कि व्यक्ति के आत्म-बलिदान से मानवता अमर बनती है। युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खून-पसीने से सींचती है। 

अत: मनुष्य के लिए उचित यही है कि वह कभी कायर न बने और अपना सब कुछ मानवता पर न्योछावर कर दे।



Class 10 Assamese Notes/Solutions




कायर मत बन



कुछ भी बन, बस कायर मत बन! 
ठोकर मार, पटक मत माथा, 
तेरी राह रोकते पाहन! 
कुछ भी बन, बस कायर मत बन!
ले-दे कर जीना, क्या जीना? 
कब तक गम के आँसू पीना? 
मानवता ने सींचा तुझको 
बहा युगों तक खून-पसीना! 
कुछ न करेगा?  किया करेगा
रे मनुष्य-बस कातर क्रंदन?
कुछ भी बन, बस कायर मत बन! 

'युद्धं देहि' कहे जब पामर, 
दे न दुहाई पीठ फेर कर! 
या तो जीत प्रीति के बल पर, 
या तेरा पथ चूमे तस्कर! 
प्रतिहिंसा भी दुर्बलता है, 
पर कायरता अधिक अपावन ! 
कुछ भी बन, बस कायर मत बन!

तेरी रक्षा का न मोल है, 
पर तेरा मानव अमोल है! 
यह मिटता है, वह बनता है, 
यही सत्य का सही तोल है! 
अर्पण कर सर्वस्व मनुज को, 
कर न दुष्ट का आत्म-समर्पण! 
कुछ भी बन, बस कायर मत बन!




Class 10 Assamese Textbook(Online Read)



अभ्यासमाला


बोध एवं विचार 

1. 'सही' या 'गलत' रूप में उत्तर दो:

(क) कवि नरेंद्र शर्मा व्यक्तिवादी गीतिकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। 
(ख) नरेंद्र शर्मा की कविताओं में भक्ति एवं वैराग्य के स्वरं प्रमुख हैं। 
(ग) पंडित नरेंद्र शर्मा की गीति-प्रतिभा के दर्शन छोटी अवस्था में ही होने लगे थे। 
(घ) 'कायर मत बन' शीर्षक कविता में कवि ने प्रतिहिंसा से दूर रहने का उपदेश दिया है। 
(ङ) कवि ने माना है कि प्रतिहिंसा व्यक्ति की कमजोरी को दर्शाती है। 

2. पूर्ण वाक्य में उत्तरदो:

(क) कवि नरेंद्र शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था? 
(ख) कवि नरेंद्र शर्मा आकाशवाणी के किस कार्यक्रम के संचालक नियुक्त हुए थे?
(ग) 'द्रौपदी' खंड काव्य के रचयिता कौन हैं? 
(घ) कवि ने किसे ठोकर मारने की बात कही है? 
(ङ) मानवता ने मनुष्य को किस प्रकार सींचा है?
(च) व्यक्ति को किसके समक्ष आत्म-समर्पण नहीं करना चाहिए? 

3. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में): 

(क) कवि नरेंद्र शर्मा के गीतों एवं कविताओं की विषयगत विविधता पर प्रकाश डालिए। 
(ख) नरेंद्र शर्मा जी की काव्य-भाषा पर टिप्पणी प्रस्तुत करो। 
(ग) कवि ने कैसे जीवन को जीवन नहीं माना है? 
(घ) कवि ने कायस्ता को प्रतिहिंसा से अधिक अपवित्र क्यों कहा है? 
(ङ) कवि की दृष्टि में जीवन के सत्य का सही माप क्या है? 

4. संक्षेप में उत्तरदो (लगभग 50 शब्दों में): 

(क) 'कायर मत बन' शीर्षक कविता का संदेश क्या है?
(ख) 'कुछ न करेगा? किया करेगा-रे मनुष्य-बस कातर क्रंदन'- का आशय स्पष्ट करो। 
(ग) 'या तो जीत प्रीति के बल पर, या तेरा पथ चूमे तस्कर'-का तात्पर्य बताओ। 
(घ) कवि ने प्रतिहिंसा को व्यक्ति की दुर्बलता क्यों कहा है? सम्यक् उत्तर दो 

5. (लगभग 100 शब्दों में): 

(क) सज्जन और दुर्जन के प्रति मनुष्य के व्यवहार कैसे होने चाहिए? पठित 'कायर मत बन' कविता के आधार पर उत्तर दो। 
(ख) 'कायर मत बन' कविता का सारांश लिखो।
(ग) कवि नरेंद्र शर्मा का साहित्यिक परिचय दो। 
6. प्रसंग सहित व्याख्या करो :

(क) "ले-दे कर जीना..... युगों तक खून-पसीना।"
(ख) "युद्धं देहि' कहे जब....तेरा पथ चूमे तस्कर।" 

भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान 

1. खाली जगहों में न', 'नहीं' अथवा 'मत' का प्रयोग करके वाक्यों को फिर से लिखो: 
(क) तू कभी भी कायर .......बन। 
(ख) तुम कभी भी कायर.....बनो। 
(ग) आप कभी भी कायर .... बनें।
(घ) हमें कभी भी कायर बनना .... चाहिए। 

2. अर्थ लिखकरनिम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो :
ले-दे कर जीना, गम के आँसू पीना, खून-पसीना बहाना, पीठ फेरना, टस से मस न होना, कालिख लगना, कमर कसना, आँचल में बाँधना 

3. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखो: 

(क) सभा में अनेकों लोग एकत्र हुए हैं। 
(ख) मुझे दो सौ रुपए चाहिए। 
(ग) बच्चे छत में खेल रहे हैं। 
(घ) मैंने यह घड़ी सात सौ रुपए से ली है। 
(ङ) मेरे को घर जाना है।
(च) बच्चे को काटकर गाजर खिलाओ। 
(छ) उसने पुस्तक पढ़ चुका। 
(ज) जब भी आप आओ, मुझसे मिलो। 
(झ) हम रात को देर से भोजन खाते हैं। 
(ज) बाघ और बकरी एक ही घाट पानी पीती है। 

4. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्ययों को अलग करो: 
आधुनिक, विषमता, भलाई, लड़कपन, बुढ़ापा, मालिन, गरीबी 

5. कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार वाक्यों को परिवर्तित करो: 
(क) मैंने एक दुबला-पतला आदमी देखा था। (मिश्र वाक्य बनाओ) 
(ख) जो विद्यार्थी मेहनत करता है वह अवश्य सफल होता है। (सरल वाक्य बनाओ) 
(ग) किसान को अपने परिश्रम का लाभ नहीं मिलता। (संयुक्त वाक्य बनाओ)
(घ) लड़का बाजार जाएगा। (निषेधवाचक वाक्य बनाओ)
(ङ) लड़की गाना गाएगी। (प्रश्नवाचक वाक्य बनाओ)

योग्यता-विस्तार 

1. कवि नरेंद्र शर्मा द्वारा रचित किसी अन्य प्रेरणाप्रद कविता का संग्रह करके कक्षा में सुनाओ। 
2. 'कायर इंसान मृत्यु से पहले सौ बार मरता है' - विषय पर मित्र-मंडली में परिचर्चा का आयोजन करो। 
3. 'प्रतिहिंसा दुर्बलता है' - विषय पर एक अनुच्छेद लिखो।

शब्दार्थ एवं टिप्पणी

कायर - डरपोक, भीरु
गम के आँसू पीना - मन के दुःख को मन में ही दबा कर ले-देकर जीना
राह = रास्ता, मार्ग
कातर क्रंदन = आर्त विलाप, कष्ट से आकुल होकर रोना
खून-पसीना बहाना = बहुत कष्ट उठाना
युद्धं देहि = युद्ध दो, युद्ध करो, लड़ाई करो
दुहाई = शपथ, किसी बात
दुहाई = शपथ, किसी बात की उचित ठहराने के लिए अन्य कोई बात जोर देकर कहा जाना 
प्रीति = प्यार, मोहब्बत 
आपवन = अपवित्र 
मोल = मूल्य, कीमत
अमोल = अमुल्य, जिसे मूल्य देकर ख़रीदा न जा सके
मनुज = मनू से जो जन्मा हो, मनुष्य
कमरकसना = किसी काम के लिए पूरी तरह तैयार होना 
पाहन = पत्थर
राह रोकते पाहन = मार्ग मै आनेवाले बधाए 
पीठ फेरना = चुनौती से भागना, लड़ाई के मैदान से भाग खड़ा होना
 तस्कर = बुरा कर्य करने वाला 
प्रतिहिंसा = हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा
मानव = मनुष्य, मानवता 
तोल = माप
टस से मस न होना = अडिग - अवीचलित रहना
कालिख लगाना = कलक लगाना 
आँचल में बाधना = किसी बात को अच्छी तरह से याद रखना


Conclusion:

कायर मत बन Lesson-11 Textbook-आलोक Online reading class 10 hindi assam seba board. 




Wrote by Akshay

Post a Comment

0 Comments

People

Ad Code