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साखी Lesson-7/ कबीरदास/ Textbook-आलोक/ Class 10 Hindi

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Class 10 Hindi Textbook-आलोक के Lesson-7 साखी को यहाँ पर ऑनलाइन पढ़ पाएंगे।

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साखी Lesson-7/ कबीरदास/ Textbook-आलोक/ Class 10 Hindi






कबीरदास (1398-1518)



हिंदी के जिन भक्त-कवियों की वाणी आज भी प्रासंगिक है, उनमें संत कबीरदास जी अन्यतन हैं। 

उन्होंने आम जनता के बीच रहकर जनता की सरल-सुबोध भाषा में जनता के लिए उपयोगी काव्य की रचना की। 

आपकी कविताओं में भक्ति भाव के अलावा व्यावहारिक ज्ञान एवं मानवतावादी दृष्टि का समावेश हुआ है। आपकी कविताएँ अपने समय में बड़ी लोकप्रिय थीं। 

इसी लोकप्रियता को लक्षित करके असम-भूमि के श्रीमंत शंकरदेव ने अपने ग्रंथ 'कीर्तन घोषा' में लिखा है कि उरेषा. वाराणसी इत्यादि स्थानों पर साधु संत लोग कबीर विरचित गीत-पद गाते हैं :

उरेषा वारानसी ठावे ठावे।
कबिर गीत शिष्टसवे गावे॥ (कीर्तन घोषा -3/32) 

महात्मा कबीरदास की रचनाएँ अपने समय में भी लोकप्रिय थीं, आज भी वे लोकप्रिय हैं और यह लोकप्रियता आगे भी बनी रहेगी। 

कविताओं की तरह उनकी जीवन-गाथा भी अत्यंत रोचक है। कहा जाता है कि स्वामी रामानंद के आशीर्वाद के फलस्वरूप सन् 1398 में काशी में एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से आपका जन्म हुआ था। 

लोक-लज्जा के कारण जन्म के तुरंत बाद माँ ने इस दिव्य बच्चे को लहरतारा नामक स्थान के एक तालाब के किनारे छोड़ दिया था। 

वहाँ से गुजरते हुए नीरू और नीमा नामक मुसलमान जुलाहे दंपति को वह बालक मिला। खुदा का आशीर्वाद समझकर उन्होंने उस दिव्य बालक को गोद में उठा लिया। 

उन्होंने बालक का नाम रखा कबीर और उसे पाल-पोसकर बड़ा किया। 'कबीर' शब्द का अर्थ है-बड़ा, महान, श्रेष्ठ। 

आगे चलकर कबीरदास जी सचमुच बड़े संत, श्रेष्ठ भक्त और महान कवि बने। सन् 1518 में मगहर स्थान में आपका देहावसान हुआ।

संत कबीरदास जी स्वामी रामानंद के योग्य शिष्य थे। 

वे इस संसार के रोम-रोम में रमने वाले, प्रत्येक अण-परमाणु में बसने वाले निर्गुण निराकार 'राम' की आराधना करते थे। उन्होंने पालक पिता-माता नीरू-नीमा की आजीविका को ही अपनाया था।

कर्मयोगी कबीरजी जलाहे का काम करते-करते अपने आराध्य के गीत गाया करते थे। अपने काम-काज के सिलसिले में घूमते-फिरते थे। 

वे लोगों को तरह-तरह के उपदेश देते थे। परवर्ती समय में शिष्यों ने उनकी अमृतोपम वाणियों को लिखित रूप प्रदान किया। 
महात्मा कबीरदास की रचनाएँ बीजक नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके तीन भाग हैं - साखी, सबद और रमैनी

भाषा पर कबीरदास जी का भरपूर अधिकार था। उनकी काव्य भाषा वस्तुतः तत्कालीन हिंदुस्तानी है, जिसे विद्वानों ने 'सधुक्कड़ी', 'पंचमेल खिचड़ी' आदि कहा है। 

जनता के कवि कबीरदास ने सरल, सहज बोध गम्य और स्वाभाविक रूप :: से आये अलंकारों से सजी भाषा का प्रयोग किया है। 

ज्ञान, भक्ति आत्मा, परमात्मा, माया, प्रेम, वैराग्य आदि गंभीर विषय उनकी रचनाओं में अत्यंत सुबोध एवं स्पष्ट रूप में व्यक्त हुए हैं।

साखी शब्द मूल संस्कृत शब्द 'साक्षी' से विकसित है। 'साक्षी' से संबंधित LIV शब्द है 'साक्ष्य, जिसका अर्थ है-प्रत्यक्ष ज्ञान। 

गुरु सत्य के साक्ष्य प्रमाण के -साथ शिष्य को इहलोक और परलोक के तत्वज्ञान की शिक्षा देते हैं। यद्यपि कबीरदास जी विविध शास्त्रों के विधिवत् अध्ययन से दूर थे, परंतु साधु संगति से उन्होंने बहुत कुछ सीखा था। 

जीवन और जगत की खुली पुस्तक को भी आपने खूब पढ़ा था। उन्होंने अपने ज्ञान और भक्ति के बल पर अपने आराध्य का साक्षात्कार भी कर लिया था। 

अतः उनके द्वारा विरचित साखियों में हमें विविध विषयों के अनमोल ज्ञान एवं अमूल्य संदेश निहित मिलते हैं। 

आत्मा के रूप में व्यक्ति के भीतर ही परमात्मा की स्थिति, सद्गुरु की महिमा, गुरु-शिष्य का संबंध, कोरे पुस्तकीय ज्ञान की निरर्थकता, मानसिक शुद्धि की आवश्यकता, जाति के बजाय ज्ञान का महत्व, आत्म-निरीक्षण की जरूरत, गहन साधना एवं कर्म की आवश्यकता, प्रेम-भक्ति की महत्ता और यथासंभव शीघ्र कर्तव्य-पालन की जरूरत-ये दस अनमोल बातें अग्रांकित दस साखियों के जरिए आकर्षक रूप में प्रस्तुत की गई हैं।


साखी


तेरा साईं तुज्झ में, ज्यों पुहुपन में बास।
कस्तूरी का मिरग ज्यों, फिर-फिर ढूँढे घास । 1 ।

सत गुरु की महिमा अनँत, अनंत किया उपगार। 
लोचन अनँत उघाड़िया, अनंत दिखावणहार । 2 ।

गुरु कुम्हार सिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़े खोट। 
अन्तर हाथ सहार दे, बाहर बाहै चोट । 3 ।

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। 
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय । 4 ।

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। 
कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर । 5 ।

जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान। 
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान । 6 ।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय । 
जो दिल खोजा आपना, मुझ-सा बुरा न कोय ।7।

जिन ढूँढा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ। 
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ ।8।

जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान। 
जैसे खाल लोहार की, साँस लेत बिनु प्रान । 9 ।

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। 
पल में परलय होएगा, बहुरि करेगो कब । 10 ।




Class 10 Assamese Notes/Solutions





(अभ्यासमाला)



बोध एवं विचार 

1. सही विकल्प का चयन करो : 

(क) महात्मा कबीरदास का जन्म हुआ था। 
(अ) सन् 1398 में
(आ) सन् 1380 में 
(इ) सन् 1370 में
(ई) सन् 1390 में 
(ख) संत कबीरदास के गुरु कौन थे? 
(अ) गोरखनाथ
(आ) रामानंद 
(इ) रामानुजाचार्य
(ई) ज्ञानदेव

(ग) कस्तूरी मृग वन-वन में क्या खोजता फिरता है?
(अ) कोमल घास
(आ) शीतल जल 
(इ) कस्तूरी नामक सुगंधित पदार्थ 
(ई) निर्मल हवा 

(घ) कबीरदास के अनुसार वह व्यक्ति पंडित है -
(अ) जो शास्त्रों का अध्ययन करता है। 
(आ) जो बड़े-बड़े ग्रंथ लिखता है। 
(इ) जो किताबें खरीदकर पुस्तकालय में रखता है।
(ई) 'जो प्रेम का ढाई आखर' पढ़ता है। 

(ङ) कवि के अनुसार हमें कल का काम कब करना चाहिए? 
(अ) आज
(आ) कल 
(इ) परसों
(ई) नरसों

2. एक शब्द में उत्तर दो:

(क) श्रीमंत शंकरदेव ने अपने किस ग्रंथ में कबीरदास जी का उल्लेख किया है?
(ख) महात्मा कबीरदास का देहावसान कब हुआ था? 
(ग) कवि के अनुसार प्रेमविहीन शरीर कैसा होता है? 
(घ) कबीरदास जी ने गुरु को क्या कहा है?
(ङ) महात्मा कबीरदास की रचनाएँ किस नाम से प्रसिद्ध हुई? 

3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :

(क) कबीरदास के पालक पिता-माता कौन थे? 
(ख) 'कबीर' शब्द का अर्थ क्या है? 
(ग) 'साखी' शब्द किस संस्कृत शब्द से विकसित है? 
(घ) साधु की कौन-सी बात नहीं पूछी जानी चाहिए?
(ङ) डूबने से डरने वाला व्यक्ति कहाँ बैठा रहता है? 

4. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में):

(क) कबीरदास जी की कविताओं की लोकप्रियता पर प्रकाश डालो। 
(ख) कबीरदास जी के आराध्य कैसे थे? 
(ग) कबीरदास जी की काव्य भाषा किन गुणों से युक्त है? 
(घ) 'तेरा साई तुझ में, ज्यों पुहुपन में बास' का आशय क्या है? 
(ड.) 'सत गुरु' की महिमा के बारे में कवि ने क्या कहा है?

5. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में):

(क) बुराई खोजने के संदर्भ में कवि ने क्या कहा है ? 
(ख) कबीर दास जी ने किसलिए मन का मनका फेरने का उपदेश दिया है? 
(ग) गुरु शिष्य को किस प्रकार गढ़ते हैं? 
(घ) कोरे पुस्तकीय ज्ञान की निरर्थकता पर कबीरदास जी ने किस प्रकार प्रकाश डाला है?

6. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में):

(क) संत कबीरदास की जीवन-गाथा पर प्रकाश डालो।
(ख) भक्त कवि कबीरदास जी का साहित्यिक परिचय दो। 

7. सप्रसंग व्याख्या करो:

(क) "जाति न पूछो साधु की............पड़ा रहन दो म्यान। 
(ख) “जिन ढूँढा तिन पाइयाँ................रहा किनारे बैठ।" 
(ग) "जा घट प्रेम न संचरै..............साँस लेत बिनु प्रान।"
(घ) "काल करे सो आज कर.............बहुरि करेगो कब।" 

भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान 

1. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप बताओ :
मिरग, पुहुप, सिष, आखर, मसान, परलय, उपगार, तीरथ 

2. वाक्यों में प्रयोग करके निम्नांकित जोड़ों के अर्थ का अंतर स्पष्ट करो: 
मनका-मन का, करका-कर का, नलकी-नल की,
पीलिया-पी लिया, तुम्हारे-तुम हारे, नदी-नदी 

3. निम्नलिखित शब्दों के लिंग निर्धारित करो:
महिमा, चोट, लोचन, तलवार, ज्ञान, घट, साँस, प्रेम 

4. निम्नांकित शब्द-समूहों के लिए एक-एक शब्द लिखो :

(क) मिट्टी के बर्तन बनाने वाला व्यक्ति 
(ख) जो जल में डूबकी लगाता हो 
(ग) जो लोहे के औजार बनाता है 
(घ) सोने के गहने बनाने वाला कारीगर
(ङ) विविध विषयों के गंभीर ज्ञान रखने वाला व्यक्ति 

5. निम्नांकित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो:
साई, पानी, पवन, फूल, सूर्य, गगन, धरती 

योग्यता-विस्तार

1. महात्मा कबीरदास द्वारा विरचित निम्नलिखित दोहों के आशय जानने का - प्रयास करो : 
प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।
राजा परजा जेहि रुच, सीस दै लै जाय । 1 ।

आये हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर। 
एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे जंजीर । 2 । 

चारि भुजा के भजन में भूलि परे सब संत। 
कबिरा सुमिरै तासु को, जाके भुजा अनंत । 3 । 
2. कबीरदास जी द्वारा विरचित प्रसिद्ध साखियों का संग्रह करके अपने सहपाठियों के बीच अंत्याक्षरी का खेल खेलो। 
3. संत कबीरदास विरचित साखियों में निहित संदेशों की प्रासंगिकता पर अपने मित्रों के बीच चर्चा करो। 
4. कबीरदास जी की 'सधुक्कड़ी' भाषा के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करो। 
5. जीवन, कर्म और भक्ति-भावना की दृष्टि से संत कबीरदास और श्रीमंत शंकरदेव की तुलना करने का प्रयास करो ।

शब्दार्थ एवं टिप्पणी 

साईं = प्रभु, ईश्वर, स्वामी
कर का = हाथ का 
तुज्झ = तुझ
मनका = माला के दाने 
पुहुपन = पुष्प, फूल 
मोल करो = मूल्य जान लो 
बास = सुगंध, खुशबू
मिलिया = मिला 

Conclusion:

Class 10 Hindi Textbook-आलोक Lesson-7 साखी Assam seba board Only for Online textbook reader.


Class 10 Assamese Textbook(Online Read)






Wrote by Akshay

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2 Comments

Unknown said…
Please , pare jodi English r lesson bor axomia loi translate kore dibo son 🙏
AK Production said…
Kuntu kuntu lesson lage kuwa?

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