Recent in Technology

श्रीमंत शंकरदेव / निबंध लेखन class 10 hindi/ Online read


Attention Please!

नमस्कार, सभी को इस पर निबंध लेखन श्रीमंत शंकरदेव के बारे मे लिखा गया है।

आर्टिकल के बिच में बोहोत सारे निबंध लेखन, क्लास १० हिंदी के टेक्स्टबुक(textbook) और लेसन नोट्स(Notes) भी प्राप्त कर पाएंगे।


श्रीमंत शंकरदेव / निबंध लेखन class 10 hindi/ Online read


श्रीमंत शंकरदेव [HSLC-2018]



श्रीमंत शंकरदेव का जन्म एक सुसंस्कृत परिवार में हुआ था। उनका जन्म नगाँव जिले के आलिपुखुरी नामक स्थान में हुआ था। 

इनके माता-पिता का निधन बचपन में ही हो गया था। इनके पिता का नाम कुसुम्बर भूयां था। शंकरदेव का पालनपोषण उनकी दादी खेरसुती ने किया था। 

ये बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। इन्होंने अल्पायु में ही बिना मात्रा की एक भावपूर्ण कविता लिख डाली । यह कविता इनके जीवन की प्रथम कविता है।

इन्होंने 22 वर्ष की आयु में समस्त वेद, पुराण, उपनिषद् एवं व्याकरण का ज्ञान प्राप्त कर लिया। इनका विवाह सूर्यवती से हुआ। 

विद्याध्ययन के बाद इन्हें अपनी रियासत का कार्यभार देखना पड़ता था। अतः शास्त्रचर्चा में व्यवधान होने लगा। 

इसी कारण उन्होंने समस्त कार्यभार अपने चाचा को सौंपकर भगवतचर्चा में संलग्न रहने लगे। शंकरदेव के एक पत्री का जन्म हुआ। 

दुर्भाग्यवश उस समय ही इनकी पत्नी का निधन हो गया। उस कारण उनको मानसिक आघात लगा। 

इसके बाद इनके हृदय में वैराग्य की भावना उत्पन्न हो गयी और वे देशाटन के लिए निकल पड़े।

शंकरदेव विभिन्न तीर्थों में भ्रमण करते रहे। तीर्थाटन के समय इनकी भेंट विद्वानों, साधु एवं संतों से हई। 

विद्वानों के सम्पर्क में रहने के कारण इनके ज्ञानकोश म वृद्धि हुई। इसके बाद इन्होंने वैष्णव धर्म का प्रचार करना प्रारम्भ किया। असम

प्रदेश के लोग प्राचीन काल से ही अन्धविश्वास व आडम्बरों से ग्रस्त थे। उस समय लोग तन्त्र-मन्त्र व तांत्रिकों तथा सामाजिक रूढ़ियों में जकड़े हुए थे। 

श्री शंकरदेव ने एकेश्वरवाद पर बल दिया। वे मर्ति पूजा के भी घोर विरोधी थे। श्री शंकरदेव की अपने धर्म के प्रति विशेष अभिरुचि थी। 

फलतः उन्होंने अनेक धार्मिक ग्रन्थों की रचना की। उनमें 'कीर्तन घोषा' प्रमुख है। इसके अतिरिक्त अंकिया नाट का भी निर्माण किया। 

इन्होंने स्थान-स्थान पर धर्म का प्रचार करने के लिए नामघर का निर्माण किया।

श्री शंकरदेव ने असम के लोगों में अहिंसात्मक क्रान्ति लाने का प्रयास किया। उन्होंने लोगों के हृदय से अज्ञान का अन्धकार दूर कर जन जागृति उत्पन्न को। 

शंकरदेव की धारणा थी कि धर्म तोडता नहीं जोड़ता है। धर्म हमारी मन, बुद्धि एवं आत्मा के परिष्कार का प्रबल साधन है। 

ईश्वर एवं धर्म के प्रति आस्था ही मानव कल्याण की प्रमुख स्रोत है।


Conclusion:


कोई भी सवाल जबाब के लिए आप हमे कॉमेट के जरिये बता सकते है। और आपको हमारे रोज का अपडेट चाहिए तोह हमारे फेसबुक ग्रुप और पेज पर ज्वाइन करे।

निचे लिंक दिया गया है।





Wrote by Akshay

Post a Comment

0 Comments

People

Ad Code