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भोलाराम का जीव/ पाठ-3/ class 10 hindi Notes

इस आर्टिकल पर आपको भोलाराम का जीव पाठ – ३ के सभी नोट दिया गया है। आप read कर सकते हैं।

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भोलाराम का जीव/ पाठ-3/ class 10 hindi Notes








पाठ-3
भोलाराम का जीव





हरिशंकर परसाई



लेखक परिचय 


आधुनिक हिन्दी व्यंग्यात्मक साहित्य के प्रतिष्ठित लेखक हरिशंकर परसाई का जन्म सन् 1922 में मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी गांव में हुआ था। नागपुर विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के बाद आपने अध्यापन कार्य शुरू किया। 

सन् 1947 से आप स्वतंत्र लेखन कार्य से जुड़ गए। आपने जबलपुर से 'वसुधा' नामक पत्रिका भी निकाली। सन् 1955 में आपका देहावसान हुआ। परसाई जी ने साहित्य की कई विधाओं में रचनाएं की है। 

परन्तु हिन्दी साहित्य जगत में वे व्यंग्य लेखक के रूप में अधिक विख्यात हुए। आपकी रचनाओं का संक्षिप्त लेखा-जोखा इस प्रकार है- 'रानी नागफनी की कहानी' और 'तट की खोज'। 

(उपन्यास), हँसते हैं रोते हैं और जैसे उनके दिन फिरे (कहानी संग्रह) भूत के पांव पीछे, पंगडंडियों का जमाना, बेईमानी की परत, सदाचार का ताबीज, शिकायत मुझे भी है (निबंध संग्रह)। ठिठुरता हुआ गणतंत्र, विकलांग श्रद्धा का दौर और तिरछी रेखाएं (व्यंग्य संग्रह) आदि हैं।

परसाई जी के निबंधों के विषय मौलिक, सामयिक एवं आकार में लघु तथा अछूते विषयों को अपने आप में समेटे हुए हैं। जहां एक ओर उन्होंने व्यंग्य रचनाओं में समाज में फैले पाखण्ड, भ्रष्टाचार शोषण, बेईमानी जैसी कुरीतियों का पर्दाफाश किया है, वहीं दूसरी ओर तिलमिलाहट पैदा करनेवाली एक अजीब शक्ति भी पैदा की है। 

इनके व्यंग्य सठीक एवं प्रभावशाली होते हैं। आम आदमी की बोलचाल की भाषा होने तथा बीच-बीच में अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग से रचनाएं बेहद रोचक बन पड़ी हैं।


पाठ का सारांश


भोलाराम का जीव' नामक व्यंग्यात्मक कहानी में हरिशंकर परसाई ने पौराणिक युग के. परिप्रेक्ष्य में आधुनिक समाज व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को मार्मिककता के साथ पेश किया है। 

यह भ्रष्टाचार लगभग हर सरकारी विभाग में व्याप्त है तथा इससे समाज का हर वर्ग प्रभावित है। पाँच साल पहले सेवानिवृत्त भोलाराम की परेशानी में आम जनता की परेशानी छिपी हुई है। 

पांच वर्षों तक पेंशन के लिए कार्यालय का चक्कर लगानेवाले भोलाराम के परिवार की आर्थिक दयनीयता, विवशता पाठकों को सोचने पर विवश कर देती है। कहानी के अंत में नारद के सामने फाइल के पन्नों से भोलाराम की आत्मा की आवाज परिस्थिति की विडम्बना को व्यंग्यात्मक बना देती है।






পাঠৰ সাৰাংশ


হৰিশংকৰ পৰচাইয়ে ‘ভােলাৰামৰ জীৱ’ নামৰ হাস্য গল্পটোত পৌৰাণিক যুগৰ আধাৰত আধুনিক সমাজ ব্যৱস্থাত বিয়পি থকা ভ্রষ্টাচাৰক হৃদয়বিদাৰক ৰূপত প্রস্তুত কৰিছে। 

আজি ভ্রষ্টাচাৰ প্রায় সকলাে চৰকাৰী বিভাগতে বিয়পিপৰিছে তথা ইসমাজৰ সকলাে শ্ৰেণীৰ মানুহৰ ওপৰত প্ৰভাৱ বিস্তাৰ কৰিছে। পাঁচ বছৰ আগতে অৱসৰ গ্ৰহণ কৰা ভােলাৰামৰ সমস্যাত সাধাৰণ মানুহৰ সমস্যাবােৰাে লুকাই আছে। 

পেঞ্চনৰ বাবে পাঁচবছৰ ধৰি চৰকাৰী কার্যালয়লৈ অহাযযাৱা কৰা ভােলাৰামৰ পৰিয়ালৰ আর্থিক দুৰৱস্থাই পাঠকক চিন্তা কৰিবলৈ বাধ্য কৰি পেলাইছে। 

গল্পটোৰ শেষত নাৰদৰ ওচৰত ফাইলৰ ভিতৰৰ পৰা ভোলাৰামৰ আত্মাই মাত দিয়া পৰিস্থিতিটোৱে অধিক ব্যংগ্যাত্মক কৰি তুলিছে।


अभ्यास-माला


1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो : 


(क) भोलाराम के जीव ने कितने दिन पहले देह त्यागी भी ? [HSLC-2016, 20]
उत्तरः भोलाराम के जीव ने पाँच दिन पहले देह त्यागी थी। 

(ख) नारद भोलाराम का घर कैसे पहचान गए ?
उत्तर : माँ-बेटी के सम्मिलित क्रंदन सुनकर नारद भोलाराम का घर पहचान गए।

(ग) धर्मराज के अनुसार नर्क में इमारतें बनाकर रहनेवालों में कौन शामिल है? 
उत्तर: धर्मराज के अनुसार नर्क में इमारतें बनाकर रहनेवालों में ठेकेदार, इंजीनियर, ओवरसीयर, आदि सभी शामिल हैं।

(घ) तुम्हारी भी रिटायर होने की उम्र आ गई।
-यह किसका कथन है ? [HSLC-2015]
उत्तर : धर्मराज का यह कथन है।

(ङ) बड़े साहब ने नारद को भोलाराम के दरख्वास्तों पर वजन रखने की सलाह दी। यहां 'वजन' का अर्थ क्या है ? [HSLC-2018] 
उत्तर : यहां 'वजन' का अर्थ है रिश्वत।

(च)भोलाराम का घर किस शहर में था?
उत्तरः भोलाराम का घर जबलपुर शहर में था। [HSLC-2014] 

(छ) भोलाराम को सेवानिवृत हुए कितने वर्ष हुए थे?
उत्तरः- भोलाराम को सेवानिवृत हुए पाँच वर्ष हुए थे।

(ज)भोलाराम की पत्नी ने भोलाराम को किस बीमारी का शिकार बताया ?[HSLC-2018]
उत्तर : भोलाराम की पत्नी ने भोलाराम को गरीबी की बीमारी का शिकार बताया। 

(झ) भोलाराम ने मकान मालिक को कितने साल से किराया नहीं दिया था?
उत्तरः भोलाराम ने मकान मालिक को एक साल से किराया नहीं दिया था। 

(ञ) बड़े साहब ने नारद से भोलाराम की पेंशन मंजूर करने के बदले क्या माँगा ?
उत्तर : बड़े साहब ने नारद से भोलाराम की पेंशन मंजूर करने के बदले नारद से उनका वीणा माँगा।

(ट) भोलाराम का जीव' शीर्षक पाठ के लेखक कौन है ? [HSLC-2017] 
उत्तरः 'भोलाराम का जीव' शीर्षक पाठ के लेखक है हरिशंकर परसाई जी। 

(ठ)धर्मराज का क्या काम है? [HSLC-2019] 
उत्तर: धर्मराज का कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग या नर्क में निवासस्थान अलँटि करते आ रहे थे।


2. संक्षेप में उत्तर दो 


(क) पर ऐसा कभी नहीं हुआ था।' यहां किस घटना का संकेत मिलता है ? 
उत्तर : यह इस घटना का संकेत मिलता है कि भोलाराम के जीव ने पाँच दिन पहले देह त्यागी और यमदूत के साथ धर्मराज के दरबार के लिए रवाना हुए, परन्तु वे अभी तक वहां नहीं पहुंचे थे।

(ख) यमदूत ने भोलाराम के जीव के लापता होने के बारे में क्या बताया ? अथवा, यमदूत के लिए भोलाराम संबंधी परेशानी क्या थी ? [HSLC-2019] 
उत्तर : यमदूत ने भोलाराम के जीव के लापता होने के बारे में यह बताया कि उसने भोलाराम के जीव को पकड़ा और स्वर्ग लोक की यात्रा आरम्भ की। नगर के बाहर जब यमदूत ने उसे लेकर एक तीव्र वायु -तरंग पर सवार हुआ, उसी समय ही वह उसके चंगुल से छुटकर गायब हो गया और उसका कहीं पता नहीं चला।

(ग) धर्मराज ने नर्क में किन-किन लोगों के आने की पुष्टि की ? उनलोगों ने क्या-क्या अनियामितताएँ की थीं?
उत्तर : धर्मराज ने नर्क में ठेकेदार, इंजीनियर, ओवरसीयर इत्यादि लोगों के आने की पुष्टि की।
उनलोगों ने निम्नलिखित अनियमितताएं की थीं :
क) ठेकेदारों ने पूरे पैसे, लेकर रद्दी इमारतें बनायी।
ख) इंजीनियरों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर पंचवर्षीय-योजनाओं का पैसा खाया। 
(ग) ओवरसीयार है, जिन्होंने गरीब मजदूरों की हाजिरी भरकर पैसा हड़पा था। 

(घ) भोलाराम की पारिवारिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: भोलाराम की पारिवारिक स्थिति बहुत ही मार्मिक तथा दयनीय थी, जबलपुर शहर के धमापुर मुहल्ले में नाले के किनारे एक डेढ़ कमरे के टूटे-फुटे मकान में वह परिवार समेत रहता था। नौकरी से पाँच साल पहले रिटायर हो गया था। उसने अपने मकान का किराया एक साल से नहीं दिया था। परन्तु इससे पहले ही भोलाराम इस संसार को छोड़ कर चला जाता है।

(ङ) 'भोलाराम ने दरख्वास्तें तो भेजी थी, पर उन पर वजन नहीं रखा था, इसलिए कहीं उड़ गई होंगी।'-दफ्तर के बाबूके ऐसा कहने का क्या आशय था?
उत्तरः दफ्तर के बाबू के ऐसा कहने का आशय था कि भोलाराम ने अपने पेंशन के लिए दरख्वास्तें तो भेजी थी परन्तु उसके साथ वह रिश्वत नहीं दी, इसलिए दरख्वास्तें कहीं इधर-उधर उड़ गई होंगी।

(च) चपरासी ने नारद को क्या सलाह दी? [HSLC-2016, '17] 
उत्तरः चपरासी ने नारद को सलाह दी कि -- 'महाराज आप क्यों इस झंझट में पड़ गए। आप अगर साल-भर भी यहाँ चक्कर लगाते रहे तो भी काम नहीं होगा। आप तो सीधे बड़े साहब से मिलिए। उन्हें खुश कर लिया तो अभी काम हो जाएगा। 

(छ) बड़े साहब ने नारद को भोलाराम के पेंशन केस के बारे में क्या बताया ? [HSLC-2015]
उत्तरः बड़े साहब ने नारद को बताया कि आप वैरागी है तथा दफ्तरों के रीति-रिवाज नहीं जानते। असल में भोलाराम ने वजन (रिश्वत) नहीं देकर गलती की है, इस वजह से आज भोलाराम की दरख्वास्तें उड़ रही हैं, आप उन पर वजन रखिए, आपका काम हो जाएगा।

(ज) भोलाराम का जीव' शीर्षक व्यंग्य समाज में फैले रिश्वतखोरी एवं भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करता है।' इस कथन की पुष्टि करो। अथवा, 'भोलाराम का जीव' शीर्षक कहानी का उद्देश्य क्या है ? (HSLC-2020] 
उत्तर : 'भोलाराम का जीव' शीर्षक व्यंग्य कहानी में कहानीकार ने यह दिखाया है कि आधुनिक समाज व्यवस्था में भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरों हर सरकारी दफ्तर में फैला हुआ है। इससे हर व्यक्ति प्रभावित है। पाँच साल पहले भोलाराम सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हुए थे। दरखास्त देते-देते गुजर गए पर। रिश्वत न देने के कारण उनकी पेंशन मंजूर नहीं हुई। यह समस्या मात्र भोलाराम की ही समस्या नहीं है। इसके द्वारा लेखक ने आम आदमी की परेशानी को सामने रखा है। 

3. आशय स्पष्ट करो 


(क) दरख्वास्तें पेपरवेट से नहीं दबतीं। 
उत्तरः इस उक्ति का आशय है - दरख्वास्ते पेपरवेट से नहीं दबती है, वह दबती हैं तो सिर्फ रिश्वत से। आज के युग में पेपरवेट की जगह रिश्वत ने ले रखी है। 

(ख) यह भी एक मंदिर है। यहां भी दान-पुष्य करना पड़ता है।
उत्तरः इस उक्ति का आशय है- जब नारद बड़े साहब से भोलाराम के पेंशन केस के बारे में बात कर रहे होते है तो बड़े साहब कहते हैं यह दफ्तर भी मंदिर है। यहां भी दान पुण्य करना पड़ता है, इसका अर्थ है कि किसी भी कार्य के लिए रिश्वत आज जरूरी है।




भाषा एवं व्याकरण ज्ञान : 


1. नीचे दिए गए द्वन्द्व समासों के भेद लिखकर उन्हें वाक्यों में प्रयोग करों :


खाना-पीना, माँ बाप, घर-द्वार, रुपया-पैसा, भात-दाल, सीता-राम, धर्माधर्म, , थोड़ा-बहुत, ठंडा-गरम, उत्थान-पतन, आकाश-पाताल। 

उत्तरः क) खाना-पीना : (खाना और पीना) समाहार द्वन्द्व समास हमें समय पर खाना-पीना करना चाहिए।' 
(ख) माँ-बाप : (माँ और बाप) - इतरेतर द्वन्द्व समास मोहन अपने माँ-बाप का एक मात्र सहारा है। 
(ग) घर-द्वारः (घर और द्वार) - समाहर द्वन्द्व समास महेश का घर-द्वार सुंदर है। 
(घ) रुपया-पैसा : (रुपया और गरीव के पास रुपया-पैसा नहीं होता है। 
(ङ) भात-दाल : (भात और दाल) समाहार पैसा) - इतरेतर द्वन्द्व समास बच्चा भात-दाल खा रहा है। 
(च) सीता-राम : (सीता और राम) - इतरेतर द्वन्द्व समास द्वन्द्व समास सीता राम हमारे आराध्य देवी-देवता है। 
(छ) धर्माधर्म : (धर्म और धर्म) - समाहार द्वन्द्व समास महापुरुष धर्माधर्म का विचार करते हैं। 
(ज) थोड़ा-बहुत : (थोड़ा अथवा बहुत) वैकल्पिक द्वन्द्व समास मेरे पास थोड़ा-बहुत धन अभी भी शेष है। 
(झ) ठंडा-गरम : (ठंडा या गरम) - वैकल्पिक द्वन्द्व समास सेठ ठंडा-गरम के चलते बाहर नहीं जाता है। 
(ब) उत्थान-पतन : (उत्थान या पतन) - वैकल्पिक द्वन्द्व समास हम अपने जीवन में तरह-तरह के उत्थान-पतन का सामना करते हैं। 
(ट) आकाश-पाताल : (आकाश या पाताल) -वैकल्पिक द्वन्द्व समास हरि परीक्षा की तैयारी में आकाश-पाताल एक कर दिया है। 

2. पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के भाववाचक संज्ञा बनाओ : 


उत्तरः शब्द भाववाचक संज्ञा
गरीब गरीबी 
असमर्थ असमर्थता
खराब खराबी 
त्याग त्यागी
तलाश तलाशी 
गृहस्थ गृहस्थी 
अभ्यस्त अभ्यास 
परेशान परेशानी 
चिल्लाना चिल्लाहट 
बीमार बीमारी
बहुत बहुतायत
कारीगर कारीगरी
मूर्ख मूर्खता
नेता नेतृत्व
वास्तविक वास्तविकता
ऊँचा ऊँचाई








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