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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया/ पाठ-६/ क्लास १० हिंदी नोट्स


पाठ-६
चिट्ठियों की अनूठी दुनिया



चिट्ठियों की अनूठी दुनिया/ पाठ-६/ क्लास १० हिंदी नोट्स









श्रीअरविंद कुमार सिंह





पाठ का सारांश




पत्र की दुनिया अजीब है। इसकी उपयोगिता हमेशा बनी हुई है। पत्र जो काम कर सकता है वह संसार का कोई भी दूसरा संचार साधन नहीं कर सकता। पत्र जैसा संतोष एसएमएस या फोन नहीं दे पाता है। पत्र से एक नया सिलसिला शुरू होता है। 

राजनीति, कला, साहित्य आदि के क्षेत्रों का तमाम विवाद पत्र से ही आरंभ होता है। मानव सभ्यता के विकास में भी पत्रों की बहुत बड़ी भूमिका है। अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग नाम होते हैं। जैसे कि उर्दू में इसे खत, संस्कृत में पत्र, , कन्नड में कागद, तेलगू में उतरम्, तथा तमिल में कड़िद कहा जाता है। 

पं. जवाहर लाल नेहरू में सन् 1953 में कहा था- हजारों सालों तक संचार का साधन सिर्फ हरकारे या फिर तेज घोड़े रहे हैं। इसके बाद पहिए आए। रेलवे और तार से भी भारी बदलाव आया। तार ने रेलों से भी तेज गति से संवाद भेजने का सिलसिला आरंभ किया। 

अब टेलीफोन, वायरलेस और आगे रडार ने दुनिया बदल रही है। पत्र लेखन अब एक कला के रूप में विकसित हो गया है। अब तो स्कूली पाठ्यक्रम में भी पत्र लेखन को शामिल कर लिया गया है। विश्व डाक संघ ने वर्ष सन् 1972 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिता भी आरंभ किया है। 

संसार के अन्य साधन विकसित होने के कारण महानगरों में पुत्राचार प्रभावित हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बरकरार है। संसार में ऐसा कोई आदमी नहीं होगा जो कभी किसी को पत्र नहीं लिखा होगा। सैनिक जिस उत्सुकता से अपने पत्रों का इंतजार करते हैं, इसका मिशाल नहीं है। 

आज भी संसार में ऐसे लोग है जो अपने पुरखों की चिट्ठियां संभाल कर रखे हैं। प्रशासक, संन्यासी, किसान आदि के बहुत से पत्र अनुसंधान के विषय है। यदि पत्र लिखने की परंपरा नहीं होती तो पिता के पत्र पुत्री के नाम नहीं होता। 

तमाम हस्तियों के धरोहर या यादगार उनके द्वारा लिखे पत्र ही हैं। देश काल और समाज को समझने का असली पैमाना तो पत्र ही है। महात्मा गांधी के पास पूरी दुनिया से पत्र आते थे। उस पर खाली महात्मा गांधी और इंडिया लिखा रहता था। 

गांधी जहां भी होते थे, उनके पत्र पहुंचा दिया जाता था। महात्मा गांधी के पास पत्र आता था तो वे उसका उत्तर तुरंत देते थे। जब उनका दाहिना हाथ दर्द करने लगता था तब वे बाएं हाथ से पत्र लिखने लगते थे। उनके पत्रों को पानेवाले उसे किसी प्रशस्ति पत्र से कम नहीं समझते थे। 

पत्र दस्तावेज से कम नहीं होते हैं। आज भी महापुरुषों के आपसी पत्र व्यवहार काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।



পাঠটোৰ সাৰাংশ



পত্ৰৰ জগতখন বিচিত্র। ইয়াৰ গুৰুত্ব চিৰ যুগমীয়া। পত্রই যি কার্য সাধন কৰিব পাৰে, সংসাৰত কোনাে যােগাযােগ ব্যৱস্থাই সেয়া কৰিব নােৱাৰে। পত্ৰৰ নিচিনা সন্তোষ এছ এমএছ বা ফোনে দিব নােৱাৰে। পত্ৰৰ দ্বাৰা এক নতুন ক্ৰম আৰম্ভ হয়। 

ৰাজনীতি, কলা, সাহিত্য আদিৰ ক্ষেত্ৰত সকলাে বাদ-বিবাদৰ সূত্রপাত পত্ৰৰ দ্বাৰাই হয়। মানৱ সভ্যতাৰ বিকাশৰ ক্ষেত্ৰতাে পত্ৰসমূহৰ বিশেষ ভূমিকা আছে। পত্রসমূহ বেলেগ বেলেগ ভাষাত বেলেগ বেলেগ নামেৰে উচ্চাৰিত হয়। 

যেনে উর্দু ভাষাত ইয়াক ‘খ’ বুলি কোৱা হয়, সংস্কৃত ভাষাত পত্র, কন্নড় ভাষাত কাগজ, তেলেগু ভাষাত উত্তৰ আৰু তামিল ভাযাত কডিদ কোৱা হয় । পণ্ডিত জৱাহৰলাল নেহৰুৱে ১৯৫৩ চনত এইদৰে কৈছিল- হেজাৰ হেজাৰ বছৰ ধৰি যােগাযােগ মাধ্যম কেৱল দূত বা ঘোড়া আছিল। 

ইয়াৰ পিছত চকাৰ আৱিষ্কাৰ হয়। তাৰ পিছত ৰেল আৰু তাৰৰ জৰিয়তে অভূতপূর্ব পৰিৱৰ্তন ঘটে। তাৰে ৰেলতকৈও অধিক দ্রুতগতিত সংবাদ পঠিওৱাৰ ক্ৰম প্ৰাৰম্ভ হ'ল। এতিয়া টেলিফোন, ওয়াৰলে আৰু ৰেৰে জগতখন পৰিৱৰ্তন ঘটাইছে।” 

পত্র লেখন এতিয়া এক কলা হিচাবে বিকশিত হৈছে। বর্তমান স্কুলীয়া পাঠ্যক্ৰমতাে পত্র লেখন সন্নিৱিষ্ট কৰা হৈছে। বিশ্বডাক সংঘই ১৯৭২ চনৰ পৰাই ১৬ বছৰৰ কম বয়সৰ ল'ৰা-ছােৱালীৰ বাবে পত্র লেখন প্রতিযােগিতা আৰম্ভ কৰিছে। 

যােগাযােগৰ অন্যান্য মাধ্যম বিকশিত হােৱাৰ ফলত মহানগৰসমূহত পত্ৰৰ ব্যৱহাৰ ব্যাহত হৈছে। যদিও গ্রামাঞ্চলত এতিয়া অব্যাহত আছে। সকলাে মানুহে যি কি কাৰণতে নহওক এবাৰ হ'লেও নিশ্চয় পত্র লিখিব লগা হৈছে। 

দেশৰ সৈনিক সকল যি উৎসাহেৰে পত্ৰৰ প্রতীক্ষা কৰে সেয়া তুলনাবিহীন। আজিও সংসাৰত এনে মানুহ আছে যিয়ে নিজৰ পূর্ব পুৰুষসকলৰ পত্ৰসমূহ সযতনে ৰাখিছে। প্রশাসক, সন্যাসী, কৃষক আদি বহুতৰে পত্ৰ গৱেষণাৰ বিষয় হৈছেগৈ। 

যদি পত্র লিখা পৰম্পৰা নাথাকিলহেঁতেন তেন্তে ‘পিতাৰ পত্ৰ পুত্ৰীৰ নামত’ৰ দৰে বিখ্যাত গ্রন্থ লিখা নহ'লহেঁতেন, সমস্ত মহান পুৰুষৰ সম্বল বা স্মৃতি তেওঁলােকৰ দ্বাৰা লিখিত চিঠি পত্রসমূহ। স্থান, কাল আৰু সমাজক বুজি পাবলৈ আচল চাবিকাঠি হ’ল পত্রসমূহ। 

মহাত্মা গান্ধীলৈ গােটেই বিশ্বই পত্ৰ প্ৰেৰণ কৰিছিল। তাত কেৱল মহাত্মা গান্ধী আৰু ইণ্ডিয়া লিখা হৈছিল। গ্রান্ধীজী য'তেই নাথাকক পত্রসমূহ তেওঁৰ ওচৰ পাইছিল গৈ। নিজৰ ওচৰলৈ অহা পত্ৰসমূহৰ উত্তৰ মহাত্মা গান্ধীয়ে লগে লগে দিছিল। 

যেতিয়া তেওঁৰ সোঁহাতখন বিষাবলৈ ধৰে তেতিয়া বাওঁহাতেৰে পত্র লিখিছিল। আচলতে পত্র দস্তাবেজতকৈ কম গুৰুত্বপূৰ্ণ নহয়। এতিয়াও মহাপুৰুষ সকলৰ চিঠি-পত্ৰসমূহ সংগৃহীত কৰি পুথি ৰূপে প্ৰকাশ কৰাৰ পৰম্পৰা অব্যাহত আছে।






अभ्यास-माला



बोध एवं विचार (तात याब निकाल ) 1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो 

(क) पत्र को उर्दू में क्या कहा जाता है ? [HSLC-2015] 
उत्तर : पत्र को उर्दू में खत कहा जाता है 

(ख) पत्र लेखन क्या है?
उत्तर : पत्र लेखन एक कला है। 

(ग) कब से विश्व डाक संघ ने पत्र लेखन की प्रतियोगिता शुरू की ?
उत्तर : सन् 1972 से विश्व डाक संघ ने पत्र लेखन की प्रतियोगिता शुरू की। 

(घ) महात्मा गांधी के पास दुनिया भर के पत्र किस पते पर आते थे? [HSLC-'16,19] 
उत्तर : महात्मा गांधी के पास दुनिया भर के पत्र महात्मा गांधी इंडिया पते पर आते थे।

(ङ) तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल किसका हैं?
उत्तर : तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल डाक विभाग का था।

(च) पत्र को कन्नड़ भाषा में क्या कहते है ? [SEBA Model, HSLC-'16,19] 
उत्तर : पत्र को कन्नड़ भाषा में कागद कहते हैं। 

(छ) एसएमएस का अर्थ क्या है ? [HSLC-'17] 
उत्तर : एसएमएस का अर्थ है लघु संदेश सेवा। 

(ज) गाँव अथवा गरीव बस्तियों के लोगों के लिए देवदुत कौन हैं ? [HSLC-'17,'20]
उत्तर : गाँव अथवा गरीव बस्तियों के लोगों के लिए चिट्टी या मनी आर्डर लेकर पहुचने वाला डाकिया देवदूत है।




2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में )




(क) पत्र ऐसा क्या काम कर सकता है जो संचार का आधुनिकतम साधन नहीं कर सकता ?
उत्तर : जो काम पत्रं कर सकता है वह संचार का आधुनिकतम साधन भी नहीं कर सकता। पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश नहीं दे सकता है। 

(ख) चिट्ठियों की तेजी अन्य किन साधनों के कारण बाधा प्राप्त हुई है ?
उत्तर : बड़े शहरों और महानगरों में संचार के नए साधनों के विकास ने चिट्ठियों की तेजी को बाधित किया है।

(ग) पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?
उत्तर : फोन या एसएमएस के संदेश छोटे होते हैं। उनसे कोई सिलसिला आरंभ नहीं होता। इसीलिए फोन या एसएमएस के संदेश पत्र जैसा संतोष नहीं दे सकते।

(घ) अपने पास आए दुनिया भर के पत्रों का जवाब गांधीजी कैसे देते थे? [HSLC-2016]
उत्तर : गांधीजी पत्रों का जवाब तुरंत देते थे। जब उनका दाहिना हाथ थक जाता था। तब वे बाएं हाथ से पत्रों के जवाब लिखने लगते थे।

(ङ) कैसे लोग बहुत उत्सुकता से अब भी पत्रों का इंतजार करते हैं ?
उत्तर : शहरी-ग्रामीण हर वर्ग के लोगों सहित हमारे सेना के जवान पत्रों का इंतजार आज भी बड़ी उत्सुकता से करते हैं।







3. उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) 




(क) पत्र को खत, कागज, उत्तरम्, लेख इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषा के नाम लिखो। 
उत्तर : पत्र को उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड़ में कागद, तेलगू में उत्तरम् तथा तमिल में कडिद कहते हैं।

(ख) पाठ के अनुसार भारत में रोज कितनी चिट्ठियां डाक में डाली जाती है और इससे क्या साबित होता है ?
उत्तर : पाठ के अनुसार भारत में हर रोज साढ़े चार करोड़ चिट्ठियां डाक मं डाली जाती हैं। इससे पत्र की अहमियत साबित होती है।

(ग) क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं ?
उत्तर : फैक्स, ई मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल चिट्ठियों की जगह कभी नहीं ले सकते क्योंकि चिट्ठियों से जो संतोष प्राप्त होता है, वह इनसे नहीं होता।

(घ) किनके पत्रों से यह पता चलता है कि आजादी की लड़ाई बहुत ही मजबूती से लड़ी गई थी? 
उत्तर : आजादी की लड़ाई के दिनों में अंग्रेज अफसरों ने अपने परिवारजनों को जो कुछ पत्र में लिखे उनसे यह पता चलता है कि आजादी की लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी गई थी।

(ङ) संचार के कुछ आधुनिक साधनों के नाम लिखो। [HSLC-2018]
उत्तर : मोबाइल, फैक्स, ई मेल आदि संचार के आधुनिक साधन है। 


4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में ) 




(क) पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए?
उत्तर : पत्र लेखन की कला के विकास के लिए डाक व्यवस्था में साथ साथ पत्रों को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए। 

स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र लेखन का विषय भी शामिल किया गया। भारत ही नहीं विश्व के कई देशों में इस प्रकार के प्रयास किए गए। 

विश्व डाक संघ ने 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित करने का सिलसिला सन् 1972 से आरंभ किया।

(ख) वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं है- कैसे?
उत्तर : बड़े-बड़े लेखक, पत्रकार, उद्यमी, कवि, प्रशासक के पत्र अनुसंधान के विषय है। भारत की आजादी की लड़ाई के दिनों में अंग्रेज अधिकारियों ने अपने परिवार को जो पत्र लिखे थे उनसे पता चलता है कि भारत की आजादी की लड़ाई 'बड़ी मजबूती से लड़ी गई थी। 

महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ ठाकुर के बीच जो पत्र व्यवहार हुआ था उससे उस समय की राजनैतिक, सामाजिक स्थिति का तो पता चलता ही है, साथ ही साथ इनकी मानसिक स्थिति का भी पता चलता है। 

इन बातों से यह साबित हो जाता है कि वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं होते हैं।

(ग) भारतीय डाकघरों की बहु आयामी भूमिका पर प्रकाश डालो।
उत्तर : भारतीय डाकघर आज मात्र चिट्ठियां भेजने का काम तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि चिट्ठियों को भेजने के साथ-साथ यह जनसेवा के कई अन्य अत्यावश्यकीय एवं महत्वपूर्ण कार्य भी करता है। 

जैसे कि मनिआर्डर भेजने का काम। आज भी भारत के दूर-दराज के गांवों में डाक द्वारा भेजे गए मनिआर्डर के रुपयों से ही चूल्हा है। 

इसी तरह लघु बचत योजना के तहत भारतीय डाकघर दूर दराज के गांवों में जहां बैंक नहीं है वहां लोगों के पैसे जमा करता है। 

समय पर लोगों के जमा पैसे उपलब्ध कराता है। इस तरह से यह एक बैंक की सुविधा भी आम लोगों को उपलब्ध करा रहा है। 

इसी प्रकार भारतीय डाक विभाग द्वारा केंद्र सरकार की और भी कई प्रकार के आर्थिक परियोजनाओं को कार्यान्वित किया जाता है। डाक पार्सल द्वारा तरह-तरह के छोटे-बड़े सामान देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भेजे जा रहे हैं।



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