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नीलकंठ/ पाठ-३/ क्लास १० हिंदी नोट्स

इस आर्टिकल पर क्लास १० हिंदी के नीलकंठ/ पाठ-३ नोट्स मिलेंगे।

नीलकंठ/ पाठ-३/ क्लास १० हिंदी नोट्स







पाठ-३
नीलकंठ




महादेवी वर्मा



लेखक परिचय




सन 1907 की होली के दिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में जन्मी महादेवी वर्मा की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर में हुई। विवाह के बाद पढ़ाई कुछ अंतराल से फिर शुरु की। वे मिडिल में पूरे प्रांत में प्रथम आई और छात्रवृति भी पाई। 

यह सिलसिला कई कक्षाओं तक चला। बौद्ध भिक्षुणी बनना चाहा, लेकिन महात्मा गांधी के आह्वान पर सामाजिक कार्यों में जुट गई । स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया। महादेवी ने छायावाद के चार प्रमुख रचनाकारों में औरों से भिन्न अपना विशिष्ट स्थान बनाया। 

इनका समस्त काव्य वेदनामय है। इन्होंने साहित्य के बेजोड़ गद्य रचनाओं से भी समृद्ध किया है। 11 सितंबर सन् 1987 को उनका देहावसान हुआ। उन्हें साहित्य अकादमी एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित प्रायः सभी प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 

भारत सरकार ने सन् 1956 में उन्हें पद्मभूषण अलंकार से अलंकृत किया था। केवल आठ वर्ष की उम्र में बारहमासा जैसी बेजोड कविता लिखनेवाली महोदवी की प्रमुख काव्य कृतियां हैं- नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, प्रथम आयाम, अग्निरेखा, यामा और गद्य रचनाएं हैं- अतीत के चलचित्र, श्रृंखला की कड़ियाँ, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, मेरा परिवार और चिंतन के क्षण । 

उनकी रचनाओं में समाज के शोषित, उपेक्षित व पीड़ित लोगों के प्रति ही नहीं बल्कि मानवेतर प्राणियों के लिए भी उतना ही प्रेम, करुणा व सहिष्णुता दृष्टिगत होती हैं।



पाठ का सारांश




एक दिन अपने एक अतिथि को स्टेशन पहुंचा कर लौटते समय लेखिका चिड़ियां बेचने वाले दुकानदार बड़े मियां से 35 रुपए में मोर के दो छोटे-छोटे बच्चे खरीद लाई। बच्चों में से एक मोर था और एक मोरनी थी। 

मोर के बच्चों को देख कर सभी ने कहा कि ये मोर के बच्चे नहीं है तीतर है। दुकानदार ने ठग लिया। लेखिका चिढ़ कर बोली कि हैं तो आखिर पक्षी के ही बच्चे न। घर लाकर लेखिका ने मोर के दोनों बच्चों को पिंजरे से बाहर निकाला। 

उन्हें पीने के लिए पानी और खाने के लिए सत्तू की गोलियां दी। दोनों बच्चे लेखिका के कमरे में इधर-उधर घूमने लगे और थक कर रद्दी की टोकरी में बैठ गए। अभ्यस्त हो जाने के बाद वे बच्चे लेखिका की कुर्सी और मेज पर भी बैठने लगे। 

कुछ दिनों तक रद्दी की टोकरी ही उनका निवास स्थान बना रहा। बिल्ली के डर से लेखिका को कमरे का दरवाजा हमेशा बंद रखना पड़ता था। धीरे-धीरे लेखिका के द्वारा पाले गए अन्य पशु पक्षी भी उनके साथ घुलमिल गए। 

मोर के दोनों बच्चे धीरे-धीरे बड़े होने लगे। मोरनी की अपेक्षा मोर का विकास अधिक तेजी से होने लगा और वह देखने में मोरनी से अधिक सुंदर लगने लगा था। लेखिका ने मोर का नाम नीलकंठ रखा और मोरनी का नाम राधा रखा। 

एक दिन खरगोश के पिंजरे में एक सांप घुस आया और खरगोश के एक बच्चे को अपने मुंह में दबा लिया। खरगोश की ची ची की आवाज सुन कर नीलकंठ वहां पहुंच गया और सांप को मार कर खरगोश को छुड़ा लिया।

सके बाद से राधा और नीलकंठ एक साथ रहने लगे। वे वसंत ऋतु में बोलते थे। वर्षा ऋतु में नाचते थे। लेखिका अपने विदेशी अतिथियों को नीलकंठ को दिखाती और वे प्रसन्न होकर उसे देखते। 

लेखिका ने एक बार पक्षियों की उसी दुकान से एक बड़ी सी घायल मोरनी खरीद लाई। उसका इलाज करके उसे स्वस्थ कर दिया और उसका नाम कुब्जा रखा। कुब्जा और राधा में आपस में नहीं पटती थी। कुब्जा राधा के अंडे तोड़ देती थी। 

नीलकंठ धीरे-धीरे कमजोर होता गया। एक दिन लेखिका ने उसे मरा हुआ पाया। वह उसे अपनी शाल में लपेट कर ले गई और उसे संगम में प्रवाहित कर दिया।







পাঠটোৰ সাৰাংশ




এদিনাখন লেখিকাই নিজৰ এজন আলহীক ষ্টেচনত এৰি ঘূৰি আহোঁতে চৰাই বিক্ৰী কৰা দোকানী ডাঙৰ মিয়াৰ পৰা ৩৫ টকাত দুটা ময়ূৰৰ সৰু সৰু পােৱালি কিনি আনিলে। 

পােৱালি কেইটাৰ এটা মতা আৰু এজনী মাইকী ময়ূৰ আছিল। ময়ুৰৰ পােৱালি কেইটা সকলােৱে ময়ুৰ নহয় ডবিক ৰােইহে বুলি কৈছিল। আৰু কৈছিল, দোকানীয়ে তেওঁক ঠগিলে। 

তেতিয়া লেখিকাই ক'লে যে যি হলেও সেইকেইটা চৰাইৰে পোৱালি। ঘৰলৈ আনি লেখিকাই ময়ূৰৰ পােৱালি দুটাক পিজৰাৰ পৰা উলিয়াই আনিলে। সিহঁতক খাবলৈ পানী আৰু আটাৰ লাৰু দিলে। 

পােৱালি দুটাই কোঠাত ইফালে সিফালে ঘূৰিবলৈ ধৰিলে আৰু ভাগৰ লগাত নষ্ট কাগজ পেলােৱা টুকৰি এটাত বহি পৰিল। অভ্যস্ত হােৱাৰ পিছত পােৱালি কেইটাই লেখিকাৰ চকী আৰু মেজতাে বহিব ল'লে। 

কিছু দিনলৈ সেই নষ্ট কাগজ পেলােৱা টুকৰিটোৱে পােৱালি দুটাৰ নিবাস স্থান আছিল। মেকুৰীৰ ভয়ৰ কাৰণে লেখিকাই কোঠাৰ দুৱাৰ সদায় বন্ধ কৰি ৰাখিবলগীয়া হৈছিল। 

লাহে লাহে লেখিকাই সংগ্রহকৰা আন আন পশু-পক্ষীৰ লগতে পােৱালি দুটা লগ হৈ যাব ধৰিলে। ময়ুৰৰ পােৱালি দুটা লাহে লাহে ডাঙৰ হ'ব ধৰিলে। মাইকী ময়ুৰৰ পােৱালিটোৰ তুলনাত মতা ময়ুৰৰ পােৱালিটোৰ বিকাশ অধিক তীব্রতৰ হ’বলৈ ধৰিলে আৰু সি মাইকী মৰা চৰাইটোতকৈ বেছি ধুনীয়া হ'বলৈ ধৰিলে। 

লেখিকাইমতা ম’ৰা চৰাইটোৰ নাম নীলকণ্ঠ আৰু মাইকী পােৱালিটোৰ নাম ৰাধা ৰাখিলে। এদিনাখন শহাপহুৰ পিজৰাত এডাল সাপ সােমাইছিল আৰু শহাপহুটোৰ চি চি মাত শুনি নীলকণ্ঠই তাত গৈ উপস্থিত হ'ল আৰু সাপালক মাৰি শহাপহুৰ পােৱালিটোক উদ্ধাৰ কৰিলে। 

ইয়াৰ পিছত ৰাধা আৰু নীলকণ্ঠ একেলগে থাকিবলৈ ল'লে। সিহঁতে বসন্ত ঋতুত মাতে, বৰষা ঋতুতনাচে। লেখিকাইনিজৰ বিদেশী অতিথিবােৰক নীলকণ্ঠক দেখুৱাইছিল আৰু তেওঁলােকে তাক দেখি আনন্দিত হৈছিল । 

লেখিকাই আকৌ এবাৰ সেইখন ৰাইৰ দোকানৰ পৰাই আৰু এজনী আহত মাইকী মৰা চৰাই কিনি আনিলে। লেখিকাই অসুস্থ চৰাইটোক চিকিৎসা কৰি তাইক সুস্থ কৰিলে আৰু তাইৰ নাম কুজা ৰাখিলে। 

কুজা আৰুৰাধা দুয়ােৰে মাজত মিল নাছিল। কুজাই এদিনাখন ৰাধাৰ কণীবােৰ ভাঙি পেলাইছিল কুজাৰ অত্যাচাৰত নীলকণ্ঠ লাহে লাহে দুর্বল হ’ব ধৰিলে। 

এদিনাখন লেখিকাই তাক মৃত অৱস্থাত উদ্ধাৰ কৰিলে। তেখেতে তাক নিজৰ উৰি থকা কাপােৰখনেৰে মেৰিয়াই লৈ গ'ল আৰু নৈ সংগমত তাক উটুৱাই দিলে।







अभ्यास माला


(क) नीलकंठ पाठ में महादेवी वर्मा की कौन सी विशेषता परिलक्षित होती हैं ?
उत्तर : जीव जंतुओं के प्रति प्रेम महादेवी वर्मा की विशेषता परिलक्षित होती है। 

(ख) महादेवी वर्मा जी ने मोर-मोरनी के जोड़े के लिए कितनी कीमत चुकाई थी? [HSLC-2016]
उत्तर : महादेवी वर्मा जी ने मोर-मोरनी के जोड़े के लिए पैंतीस रुपए कीमत चुकाई थी।

(ग) विदेशी महिलाओं ने नीलकंठ की कया उपाधि दी थी? [HSLC-2016, '18, 20] उत्तर : विदेशी महिलाओं ने नीलकंठ की परफैक्ट जैटिलमैन उपाधि दी थी। 

(घ) महादेवी ने अपनी पालतू बिल्ली का नाम चित्रा रखा था? [HSLC-2018] 
उत्तर : महादेवी ने अपनी पालतू बिल्ली का नाम चित्रा रखा था।

(ङ) चिड़ीमार ने बड़े मिया से मोर के जोड़ो के कितने नकद रुपए लिए थे? [HSLC-2018]
उत्तरः चिड़ीमार ने बड़े मिया से मोर के जोड़ो के लिए तीस रुपए लिए थे।

(च) नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु कौन थी ?
उत्तर : नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु वर्षा ऋतु 

(छ) पडिंत महादेवी वर्मा के पाठ का नाम क्या है ? [HSLC-2017] 
उत्तर : पठित महादेवी वर्मा के पाठ का नाम 'नीलकंठ' है। 

(ज) राधा किसका नाम है ? [HSLC-2017]
उत्तर : राधा मोरनी का नाम है। 

(झ) मयूर किसका युद्ध-वाहन है ? [HSLC-2019]
उत्तरः मयूर कार्तिकेय का युद्ध वाहन है।








2. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)



(क) मोर-मोरनी के जोड़े को लेकर घर पहुंचने पर सब लोग महादेवी जी से क्या कहने लगे?
उत्तर : मोर मोरनी के जोड़े को लेकर महादेवी वर्मा जी घर पहुंची तब सब कहने लगे कि यह मोर नहीं है, तीतर है। दुकानदार ने ठग लिया है। 

(ख) महादेवी जी के अनुसार नीलकंठ को कैसा वृक्ष अधिक भाता था? 
उत्तर : महादेवी जी के अनुसार नीलकंठ को पुष्पित और पल्लवित वृक्ष अधिक भाता था।

(ग) नीलकंठ को राधा और कुब्जा में से कौन अधिक प्यारी थी और क्यों
उत्तर : नीलकंठ को राधा और कुब्जा में से राधा अधिक प्यारी थी, क्योंकि वह जन्म से ही उसके साथ रहता आ रहा था।

(घ) मृत्यु के बाद नीलकंठ का संस्कार महादेवी जी ने कैसे किया? [HSLC-2016]
उत्तर : मृत्यु के बाद नीलकंठ को महादेवी वर्मा जी अपने शाल में लपेटकर उसे संगम पर ले गई और उसमें प्रवाहित कर दिया।



3. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में)




(क) बड़े मियां ने मोर के बच्चे दूसरे को न देकर महादेवी जी को ही क्यों देना चाहता था ?
उत्तर : हालांकि बड़े मियां पक्षियों का व्यापार करता था। पक्षियों को पकड़ना मारना उसका रोज का काम था। लेकिन वह भी तो इंसान था। 

उसके दिल में भी दया थी। दवा बनाने के लिए लोग मोर के बच्चे को मार देंगे। वह यह नहीं चाहता था। वह जानता था कि महादेवी जी उसे ले जाकर पालेंगी। इसीलिए बड़े मियां मोर के बच्चे को महादेवी वर्मा को ही देना चाहता था।

(ख) महादेवी जी ने मोर और मोरनी के क्या नाम रखे और क्यों?
उत्तर : महादेवी जी ने मोर का नाम नीलकंठ और मोरनी का नाम राधा रखा। उन्होंने ऐसा मोर का नाम नीलकंठ इसलिए रखा क्योंकि मोर के गले के चारों तरफ नीला निशान था। 

मोरनी का नाम राधा इसलिए रखा क्योंकि मोरनी मोर के साथ उसकी छाया की तरह हमेशा रहती थी। ठीक उसी तरह जिस तरह कि राधा कृष्ण के साथ रहती थी।

(ग) लेखिका के अनुसार कार्तिकेय ने मयूर को अपना वाहन क्यों चुना होगा? मयुर की विशेषताओं के आधार पर उत्तर दो ?
उत्तर : लेखिका के अनुसार कार्तिकेय ने मयूर को अपना वाहन उसके रूप और स्वभाव के कारण चुना होगा। मयूर कला प्रिय भी होता है और वीर भी होता है। इसी से उसे बाज, चील जैसे अन्य पक्षियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। 

(घ) नीलकंठ के रूप रंग का वर्णन अपने शब्दों में करो। [HSLC-2018] इस दृष्टि से राधा कहां तक भिन्न थी ?
उत्तर : मोर के सिर की कलगी सघन, ऊंची और चमकीली थी। चोंच अधिक बंकिम और पैनी थी। उसकी आंखें गोल और नीली थीं। उसके दोनों पंख भी सुंदर थे। पंछ लंबी थी। गर्दन ऊंची थी।

मोरनी का विकास मोर जैसा नहीं था। लेकिन उसकी पूंछ भी लंबी थी। कलगी चंचल थी। पंखों का रंग श्याम श्वेत था।

(ङ) बारिश में भीग कर नृत्य करने के बाद नीलकंठ और राधा पंखों को कैसे सूखाते थी?
उत्तर: बारिश बंद हो जाने के बाद नीलकंठ और राधा अपने बांए पंजे पर बांया पंख और दाहिने पंजे पर बांया पंख रख कर सुखाते थे। कभी-कभी वे एक दूसरे के पंख से गिरने वाले बूंद-बूंद पानी को अपने चोंच से पी कर सुखाते थे। 

(च) नीलकंठ और राधा के नृत्य का वर्णन अपने शब्दों में करो।
उत्तर: नीलकंठ जब मेघ की छाया में अपने पंखों को गोलाकार बना कर नाचता था तब उस नृत्य में एक सहज लय होता था। वह आगे-पीछे, दाहिने-बांए घूम कर नाचता था। 

लेकिन राधा नीलकंठ के समान नहीं नाच सकती थी। फिर भी उसकी गति में भी एख छंद होता था। वह नाचते नाचते नीलकंठ के दाहिने पंख को छूती हुई निकल जाती थी। इसी प्रकार बांए पंख को छूती हुई दाहिनी ओर निकल जाती थी। 

इस तरह राधा नाचते-नाचते नीलकंठ की परिक्रमा कर लेती थी। इस प्रकार उसके नाच में भी एक ताल था।

(छ) बसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय हो ?
उत्तर : असल में नीलकंठ को फलों से अधिक अच्छे पल्लवित और पुष्पित वृक्ष लगते थे। यहीं कारण था कि बसंत ऋतु में वृक्ष जब पल्लवित और पुष्पित हो जाते थे तब नीलकंठ उन पेड़ों पर जाने के लिए व्यग्र हो उठता था। तब उसकी. जाली घर में बंद रखना असंभव हो जाता था। लेखिका को उसे जाली घर से आजाद कर देना पड़ता था।

(ज) जाली के बड़े घर में रहने वाले जीव-जंतुओं के आचरण का वर्णन करो।
उत्तर : मोर के बच्चों को जब जालीघर के अंदर रखा गया तब मानो जालीघर में भूचाल सा आ गया। कबूतर नाचना छोड़कर उसके चारों ओर बैठकर निरीक्षण करने लगे। छोटे खरगोश उस पर उछलने लगे। तोते उसे एक आंख बंद करके देखने लगे। 

(झ) नीलकंठने खरगोश के बच्चे को सांप से कैसे बचाया? [HSLC-2016,'18] 
उत्तर : सांप ने खरगोश के बच्चे को पीछे से पकड़ रखा था। उसकी ची ची की आवाज सुनकर सांप उसके पास पहुंच गया। नीलकंठ ने सांप को फन के पास अपने पंजों से दबा लिया और चोंच से उस पर इतना प्रहार किया कि वह मर गया। इस, प्रकार से नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को सांप से बचा लिया था।

(ञ) लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएं बहुत भाती थीं? [HSLC-2019]
उत्तर : नीलकंठ का नृत्य लेखिका को बहुत भाता था। वह अपने पंखों को सतरंगी मंडलाकार बनाकर नाचने लगता था। जिन नुकीली पैनी चोंच से वह सांपों पर प्रहार करता था उसी पैनी नुकीली चोंच से वह लेखिका की हथेली पर रखे भुने चने बड़ी कोमलता से और बड़े हौले-हौले उठा कर खाता था। नीलकंठ की यही सब चेष्टाएं लेखिका को बहुत भाती थीं।







4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में)



(क) नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का वर्णन अपने शब्दों में करो। [HSLC-2020] अथवा, नीलकंठ की प्रवृत्तियो को रेखांकित करो। [HSLC-2019] 
उत्तर : नीलकंठ में उसकी जातिगत विशेषताएं तो थी ही उसका मानवीकरण भी होने लगा था। वह केवल कलाकार ही नहीं था। 

केवल कलात्मक ढंग से लयताल से नाचता ही नहीं था, वह वीर भी था। सांपों पर बड़ी भयंकरता से प्रहार करता था। छोटे पशु पक्षियों के प्रति वह सहदय था। 

सांप से छुड़ाकर वह खरगोश के घायल छोटे बच्चे को रात भर अपने पंखों की गरमी देता रहा था। फलों के बदले उसे पल्लवित और पुष्पित वृक्ष अधिक अच्छे लगते थे। घटा देखकर वह अपने पंखों का गोल घेरा बनाकर लय ताल के साथ नाचने लगता था। 

अपनी नुकीली चोंच से वह लेखिका की हथेली पर रखे भूने चने की बड़ी कोमलता से और हौले हौले उठाकर खाता था।

(ख) कुब्जा औरराधा के आचरण में क्या अंतरपरिलक्षित होते हैं? 
उत्तर : कुब्जा और राधा के आचरण में ये अंतर परिलक्षित होते हैं कि राधा जहां अपने अंडे को बड़े प्यार से सेती थी वहीं कुब्जा उसे चोंच मार कर तोड़ देती थी। राधा हमेशा नीलकंठ के पास रहना चाहती थी लेकिन कुब्जा उसे मार-मार कर उससे दूर भगा देती थी। राधा शांत और सहृदय थी। पर कुब्जा क्रूर और दुष्ट थी। कुब्जा की किसी पशु-पक्षी के साथ मित्रता नहीं थी।

(ग) मयूरकलाप्रिय वीरपक्षी है, हिंसक मात्र नहीं-इसका आशय समझकर लिखो। 
उत्तर : इसका आशय यह है कि मयूर के स्वभाव में वीरता के साथ-साथ कलाप्रियता भी मिश्रित होता है। वह मेघ को देखकर जितनी सुन्दरता से नाचता है, सांप को देख कर उतनी ही निडरता और वीरता से उस पर प्रहार भी करता है। दूसरी ओर बाज, चील जैसे पक्षी में किसी प्रकार की कलाप्रियता नहीं रहती है। वे केवल हिंसक होते हैं। अत: बाज, चील जैसे हिंसक पक्षियों की श्रेणी में मयूर को नहीं रखा जा सकता है।



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