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महादेवी वर्मा (1907-1987) | पद्य खंड | स्पेर्श भाग - २ कक्षा १०

स्पेर्श भाग - २ कक्षा १० के लिए  हिंदी (द्दितीय भाषाा) की पाठ्यपुस्तक



महादेवी वर्मा (1907-1987) | पद्य खंड | स्पेर्श भाग - २ कक्षा १०




महादेवी वर्मा (1907-1987)


1907 की होली के दिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में जन्मीं महादेवी वर्मा की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर में हुई। विवाह के बाद पढ़ाई कुछ अंतराल से फिर शुरू की। वे मिडिल में पूरे प्रांत में प्रथम आईं और छात्रवृत्ति भी पाई। यह सिलसिला कई कक्षाओं तक चला। बौद्ध भिक्षुणी बनना चाहा लेकिन महात्मा गांधी के आह्वान पर सामाजिक कार्यों में जुट गईं। उच्च शिक्षा के लिए विदेश न जाकर नारी शिक्षा प्रसार में जुट गईं। स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया।

महादेवी ने छायावाद के चार प्रमुख रचनाकारों में औरों से भिन्न अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया। महादेवी का समस्त काव्य वेदनामय है। इनकी कविता का स्वर सबसे भिन्न और विशिष्ट तो था ही सर्वथा अपरिचित भी था। इन्होंने साहित्य को बेजोड़ गद्य रचनाओं से भी समृद्ध किया है।

11 सितंबर 1987 को उनका देहावसान हुआ। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित प्रायः सभी प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने 1956 में उन्हें पद्मभूषण अलंकरण से अलंकृत किया था।

कुल आठ वर्ष की उम्र में बारहमासा जैसी बेजोड़ कविता लिखने वाली महादेवी की प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं- नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, प्रथम आयाम, अग्निरेखा, यामा और गद्य रचनाएँ हैं-अतीत के चलचित्र, शृंखला की कड़ियाँ, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, मेरा परिवार और चिंतन के क्षण। महादेवी की रुचि चित्रकला में भी रही। उनके बनाए चित्र उनकी कई कृतियों में प्रयुक्त किए गए हैं।

पाठ प्रवेश


औरों से बतियाना, औरों को समझाना, औरों को राह सुझाना तो सब करते ही हैं, कोई सरलता से कर लेता है, कोई थोड़ी कठिनाई उठाकर, कोई थोड़ी झिझक-संकोच के बाद तो कोई किसी तीसरे की आड़ लेकर। लेकिन इससे कहीं ज़्यादा कठिन और ज्यादा श्रमसाध्य होता है अपने आप को समझाना। अपने आप से बतियाना, अपने आप को सही राह पर बनाए रखने के लिए तैयार करना। अपने आप को आगाह करना, सचेत करना और चैतन्य बनाए रखना।

प्रस्तुत पाठ में कवयित्री अपने आप से जो अपेक्षाएँ करती हैं, यदि वे पूरी वे हो जाएँ तो न सिर्फ़ उसका अपना, बल्कि हम सभी का कितना भला हो सकता है। चूँकि, अलग-अलग शरीरधारी होते हुए भी हम हैं तो प्रकृति की मनुष्य नामक एक ही निर्मिति।


मधुर मधुर मेरे दीपक जल!

मधुर मधुर मेरे दीपक जल! 
युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल, 
प्रियतम का पथ आलोकित कर!

सौरभ फैला विपुल धूप बन, 
मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन; 
दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित, 
तेरे जीवन का अणु गल गल! 
पुलक पुलक मेरे दीपक जल!

सारे शीतल कोमल नूतन, 
माँग रहे तुझसे ज्वाला-कण 
विश्व-शलभ सिर धुन कहता 'मैं 
हाय न जल पाया तुझ में मिल'! 
सिहर सिहर मेरे दीपक जल!

जलते नभ में देख असंख्यक, 
स्नेहहीन नित कितने दीपक; 
जलमय सागर का उर जलता,
विद्युत ले घिरता है बादल!
विहँस विहँस मेरे दीपक जल!  


प्रश्न-अभ्यास


(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

1. प्रस्तुत कविता में 'दीपक' और 'प्रियतम' किसके प्रतीक हैं?
2. दीपक से किस बात का आग्रह किया जा रहा है और क्यों? 
3. 'विश्व-शलभ' दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?
4. आपकी दृष्टि में 'मधुर मधुर मेरे दीपक जल' कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर है
(क) शब्दों की आवृत्ति पर।
(ख) सफल बिंब अंकन पर। 

5. कवयित्री किसका पथ आलोकित करना चाह रही हैं? 
6. कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन से क्यों प्रतीत हो रहे हैं? 
7. पतंगा अपने क्षोभ को किस प्रकार व्यक्त कर रहा है?
8. कवयित्री ने दीपक को हर बार अलग-अलग तरह से 'मधुर मधुर, पुलक-पुलक, सिहर-सिहर और विहँस-विहँस' जलने को क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।

9. नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

जलते नभ में देख असंख्यक, 
स्नेहहीन नित कितने दीपक;
जलमय सागर का उर जलता, 
विद्युत ले घिरता है बादल!
विहँस विहँस मेरे दीपक जल! 

(क) 'स्नेहहीन दीपक' से क्या तात्पर्य है? 
(ख) सागर को 'जलमय' कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है? 
(ग) बादलों की क्या विशेषता बताई गई है?
(घ) कवयित्री दीपक को 'विहँस विहँस' जलने के लिए क्यों कह रही हैं?

10. क्या मीराबाई और 'आधुनिक मीरा' महादेवी वर्मा इन दोनों ने अपने-अपने आराध्य देव से मिलने के लिए जो युक्तियाँ अपनाई हैं, उनमें आपको कुछ समानता या अंतर प्रतीत होता है? अपने विचार प्रकट कीजिए। 

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए - 

1. दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु गल गल!

2. युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल,
प्रियतम का पथ आलोकित कर! 

3. मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन!


भाषा अध्ययन


1. कविता में जब एक शब्द बार-बार आता है और वह योजक चिह्न द्वारा जुड़ा होता है, तो वहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है; जैसे–पुलक-पुलक। इसी प्रकार के कुछ और शब्द खोजिए जिनमें यह अलंकार हो।

योग्यता विस्तार


1. इस कविता में जो भाव आए हैं, उन्हीं भावों पर आधारित कवयित्री द्वारा रचित कुछ अन्य कविताओं का अध्ययन करें; जैसे

(क) मैं नीर भरी दुख की बदली
(ख) जो तुम आ जाते एकबार
ये सभी कविताएँ 'सन्धिनी' में संकलित हैं। 

2. इस कविता को कंठस्थ करें तथा कक्षा में संगीतमय प्रस्तुति करें।
3. महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहा जाता है। इस विषय पर जानकारी प्राप्त कीजिए। 

शब्दार्थ और टिप्पणियाँ


सौरभ - सुगंध 
विपुल - विस्तृत 
मृदुल - कोमल 
अपरिमित - असीमित / अपार 
पुलक - रोमांच 
ज्वाला-कण - आग की लपट / आग का लघुतम अंश 
शलभ - फतिंगा / पतंगा 
सिर धुनना -  पछताना 
सिहरना - काँपना / थरथराना 
स्नेहहीन - तेल / प्रेम से हीन 
उर - हृदय 
विद्युत - बिजली 

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